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कमेले की जमीन में अस्पताल निर्माण पर भू उपयोग का अडंगा

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कमेले की जमीन पर अस्पताल निर्माण में अड़ंगा
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मेरठ। नगर निगम द्वारा खाली कराई गई पुराने कमेले की जमीन पर राजकीय कन्या इंटर कॉलेज का निर्माण हो चुका है। वहीं इसी जमीन के खाली भाग पर 50 बिस्तरों का अस्पताल निर्माण भी प्रस्तावित है। इसके लिए 23.50 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत कर दिया गया। लेकिन मामला मानचित्र स्वीकृति में अटक गया है। एमडीए ने जमीन का अधिकांश हिस्सा आवासीय क्षेत्र मेें होने के कारण आपत्ति लगा दी है।
हापुड़ रोड पर खसरा नंबर 3709 पर कमेला था। जिसे नगर निगम द्वारा वर्ष 2014 में खाली कराया गया था। निर्माण को ध्वस्त करते हुए जमीन को मैदान बना दिया गया था। इस जमीन पर राजकीय कन्या इंटर कॉलेज और अस्पताल बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। स्कूल निर्माण पर तो काम तेजी से हुआ और अब वह संचालित भी है। लेकिन अस्पताल की स्वीकृति देरी से हुई।
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प्रदेश सरकार ने नवंबर 2016 में यहां खाली भूखंड पर 50 बिस्तरों के अस्पताल निर्माण के लिए बजट स्वीकृत कर कार्यदायी संस्था भी नियुक्त कर दी। लेकिन जब उक्त अस्पताल के निर्माण का मानचित्र तैयार कराकर एमडीए में स्वीकृति के लिए भेजा गया तो एमडीए सचिव ने इस पर आपत्ति लगा दी। कहा कि जमीन का अधिकांश भू उपयोग आवासीय क्षेत्र में आता है। ऐसे में नियमानुसार इतने बड़े अस्पताल का निर्माण नहीं हो सकता है। आवासीय क्षेत्र में 12 मीटर चौडे़ मार्ग पर अधिकतम 20 बिस्तरों के नर्सिंग होम निर्माण की ही स्वीकृति मिल सकती है। इस मामले में सीएमओ डॉ. राजकुमार ने जिलाधिकारी अनिल ढींगरा को अवगत कराया। जिस पर जिलाधिकारी ने इस मामले में विभागीय उच्चाधिकारियों से दिशा निर्देश प्राप्त करने के बाद ही निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। जिसके बाद सीएमओ ने अब विशेष सचिव चिकित्सा को पत्र लिखते हुए दिशा निर्देश मांगा है।
अस्पताल बना तो लाखों गरीबों को मिलेगा लाभ
हापुड़ रोड पर कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। जबकि इस मार्ग पर कई मलिन बस्तियों के साथ ही यह अल्पसंख्यक बहुल इलाका है। इस अस्पताल के यहां बनने पर एक तरफ जहां इस क्षेत्र में रहने वाले करीब तीन लाख लोगों को चिकित्सा सेवा आसानी से उपलब्ध होगी। वहीं मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जिला अस्पताल से भी भार कम होगा। इसके अलावा हापुड़ रोड और उसके आसपास के लोग त्वरित इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं, जिनमें जाने के बाद इन लोगों पर बहुत ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ता है। इस सरकारी अस्पताल बनने के बाद गरीब जनता को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा।
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20 बेड का बन सकता है अस्पताल
एमडीए ने भूउपयोग नीति का जो हवाला दिया है, उसे देखते हुए यहां 20 बेड के अस्पताल का निर्माण हो सकता है। यदि शासन 50 बेड के अस्पताल के निर्माण पर ही अड़ा रहा तो इस जमीन का भूउपयोग परिवर्तन कराना होगा, जिसमें मामला लंबे समय के लिए अटक सकता है। ऐसे में चिकित्सा विभाग की कवायद यहां फिलहाल 20 बेड बनाने की हो सकती है।


खास बातें:
बीस करोड़ की लागत से 50 बिस्तरों का बनना है अस्पताल
एमडीए ने भू उपयोग आवासीय होने के कारण किया मानचित्र स्वीकृत करने से इंकार
नियमानुसार बन सकता है मात्र 20 बिस्तर का अस्पताल
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