पंचकल्याणक का चौथा दिन
मेरठ। आचार्य वसुनंदी मुनिराज ने कहा कि प्रभु का आहार शुद्धता के साथ हुआ, लेकिन मानव का खानपान अशुद्ध हो गया है। पहले महिलाएं भोजन बनाते समय मंत्र जाप करती थीं और भजन गाती थीं। आजकल खाना बनाते समय टेलीविजन देखती हैं। जिससे अभिशप्त होकर वह खाना हमारी क्रियाएं खराब कर रहा है। इससे स्वास्थ्य खराब हो रहा है।
यह संदेश बुधवार को आचार्य वसुनंदी मुनिराज ने बागपत रोड स्थित वसुनंदी विहार में तप कल्याणक के पश्चात ज्ञान कल्याणक में प्रवचन के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि मात्र प्रभु को आहार कराने से ही जीवन का कल्याण होने वाला नहीं है। कुछ संकल्पों को धारण करने से ही जीवन सुखमय होगा। उन्होंने कहा कि संन्यासी की आराधना सरल है। संन्यास की आराधना कठिन है। प्रभु आदिनाथ तो अकेले ही निकल पड़े थे संन्यास के मार्ग पर। कुछ ऐसा सौभाग्य रहा कि उनके साथ चार हजार राजाओं ने भी मुनि दीक्षा को स्वीकार किया।
प्रवचन से पहले मुनि आदिनाथ का प्रथम आहार हुआ। राजा श्रेयांस एवं राजा सोम ने गन्ने के रस से मुनिराज को प्रथम आहार दान किया। आदिनाथ भगवान के जयकारों से कार्यक्रम स्थल गूंज उठा। इस दौरान सुरेश जैन रितुराज को जैन रत्न उपाधि से सम्मानित किया गया। सुनील जैन प्रवक्ता ने बताया कि आचार्य वसुनंदी मुनिराज ससंघ का विहार बृहस्पतिवार को दो बजे वसुनंदी विहार से जैन बोर्डिंग के लिए होगा। इस अवसर पर रूपेश जैन ने भजन गाए। कार्यक्रम में प्रवेश जैन, अरुण जैन, विपिन जैन, हंस जैन आदि का मुख्य सहयोग रहा।