सरकारी धान क्रय केंद्रों से किसानों का मोह भंग
धामपुर(बिजनौर)। किसानों का सरकार के धान क्रय केंद्रों से मोह भंग हो गया है। अधिकारियों की अनदेखी के चलते अधिकांश क्रय केंद्र सुनसान पड़े हैं। अधिकांश क्रय केंद्र एक दाना भी धान का नहीं खरीद पाए हैं। जनपद के धान क्रय केंद्र खरीद के 44800 मीट्रिक टन लक्ष्य से कोसों दूर हैं।
धान खरीदारी कराने में अधिकारियों की कोई दिलचस्पी दिखाई नहीं दे रही है। शासन से बिजनौर जनपद को 44800 मीट्रिक टन धान खरीदारी का लक्ष्य तो मिल गया, मगर हालात देखकर नहीं लग पा रहा है कि खाद्य विपणन विभाग लक्ष्य को भी छू पाएगा। अब तक खाद्य विपणन विभाग की छह एजेंसी लक्ष्य का 7.53 प्रतिशत धान की खरीद कर पाए हैं। एजेंसियों ने कुल 3371 मीट्रिक टन धान ही खरीदा है। यही हालत रही तो शासन की मंशा को पूरा करना मुश्किल होगा। भाकियू के मंडल सचिव रमेशचंद्र शेखावत, देवेंद्र कौशिक, सुरेश सिंह आदि का आरोप है कि अफजलगढ़ ब्लॉक में धान की जनपद में सबसे ज्यादा पैदावार होती है। आरोप है कि धान के हब को क्रय केंद्र से वंचित रखा गया। सुआवाला से लेकर बादीगढ़ तक कोई धान क्रय केंद्र नहीं लगाया गया। इसकी वजह यह है कि इस मार्ग पर आधा दर्जन राइस मिल कारोबारी हैं। जिनकी मिलीभगत के चलते कोई क्रय केंद्र नहीं खोला जा सका। क्रय केंद्र संचालकों की मिलीभगत से इस क्षेत्र में पूरे धान की खरीदारी व्यापारी कर रहे हैं। व्यापारी केंद्र संचालकों धान खरीदारी कराने के लिए मोटा कमीशन भी उपलब्ध करा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि शासन के धान के लक्ष्य को पूरा कराने में अफजलगढ़ ब्लॉक ही सक्षम था। मगर, राइस मिल कारोबारी धान का भारी स्टॉक कर चुके हैं। इतने भारी स्टॉक की इन राइस मिल संचालकों को अनुमति तक नहीं है। फिर भी सरकार और शासन की आंखों में धूल झोंककर राइस मिलों पर अधिकारियों की मिलीभगत से खरीदारी चल रही है।
व्यापारियों से मिलीभगत की होगी जांच
जिला खाद्य विपणन अधिकारी अरविंद दूबे का कहना है कि व्यापारियों से क्रय केंद्र संचालकों की मिलीभगत की जांच होगी। व्यापारियों का स्टॉक की जांच होगी। क्षमता से अधिक किसी भी व्यापारी को धान नहीं खरीदने दिया जाएगा।