फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सबूत न होता तो पीवीवीएनएल वसूल लेता पौने दो लाख का बिल

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

मेरठ।
पीवीवीएनएल के बिलिंग सिस्टम से हर कोई परेशान है। बिजली खपत सेे बढ़े बिल मिलने और बिल जमा करने पर भी बकाया बिल भेजने से त्रस्त लोग अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। यहां से निराश होने के बाद मामले विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम पहुंच रहे है। फोरम ने एक ऐसे ही मामले को निपटाया है, जिसमें उपभोक्ता द्वारा हर माह बिल देने के बाद भी विभाग बकाया दर्शाता रहा।
मामला जनपद हापुड़ के गांव निवासी गणेश दत्त त्यागी का है। गणेश दत्त त्यागी सन 1982 से अपने नलकूप का बिल हर माह जमा करते आ रहे हैं। लेकिन पीवीवीएनएल की तरफ से बकाये बिल का नोटिस पिछले 36 साल से मिल रहा है। कई बार शिकायत के बाद भी बिल ठीक नहीं किया जा सका। परेशान गणेश दत्त ने ने विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम में पीवीवीएनएल के खिलाफ वाद दायर किया। फोरम के चेयरमैन एनके संगल ने बताया कि उपभोक्ता गणेश दत्त त्यागी ने 1982 से लेकर 2017 तक जमा किए गए बिलों की रसीद फोरम को मुहैया कराई।
विज्ञापन
विज्ञापन

विपक्षी ने जारी किए फोरम के नोटिस पर जवाब दिया कि उपभोक्ता के नाम निजी नलकूप कनेक्शन संख्या 2815/010466 अनुबंधित भार 5 हार्स पावर विद्युत लेजर के अनुसार माह मार्च 2017 तक बकाया धनराशि 179979 रुपये दर्शाई गई है। जबकि उपभोक्ता द्वारा जमा कराई गई बिल बुक की छाया प्रति के अनुसार उक्त संयोजन का बिल माह जून 2017 तक लगातार जमा किया जा रहा है। लेजर व बिल बुक द्वारा दर्शाई गई विद्युत बकाया धनराशि का अंतर वर्ष 1992 से शुरू होकर अब तक लगातार चला आ रहा है। तमाम सबूतों को देखकर फोरम ने परिवादी के विरुद्ध अब तक दर्शाई जा रही धनराशि 179979 रुपये निरस्त कर दिया।

खास बातें==
- नलकूप उपभोक्ता जमा करता रहा बिल, पीवीवीएनएल दिखाता रहा बकाया
- विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम में वादी के पक्ष में सुनाया अहम फैसला
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें