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1398 शिक्षकों में से 1143 की सत्यापन रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली

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मेरठ। जिले में माध्यमिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत 1398 शिक्षक हैं, इनमें से अभी तक महज 255 शिक्षकों की सत्यापन रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को प्राप्त हुई है। 1143 शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी सत्यापन रिपोर्ट लटकी हुई है। इसकी एक वजह तो हीलाहवाली है और दूसरी वजह विश्वविद्यालयों की तरफ से मांगा जा रहा शुल्क है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में इसका कोई बजट नहीं आता है, जबकि विवि सत्यापन के 250 रुपये प्रति शिक्षक मांग रहा है।
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कोई शिक्षक बिना प्रमाण पत्र या गलत प्रमाण पत्रों के तो नौकरी नहीं कर रहा। इसकी जांच के लिए प्रदेश के सभी जिलों में शासन स्तर से कमेटी बनाई गई है। सभी सरकारी और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र संबंधित विवि को भेजे गए हैं। शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच प्रक्रिया जुलाई 2020 में ही पूरी होनी थी। शिक्षकों के प्रमाण पत्र संबंधित विश्वविद्यालयों को सत्यापन के लिए भेजे गए हैं। अभी तक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में 255 शिक्षकों के ही प्रमाण पत्र सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त हुई है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से सत्यापन के लिए निर्धारित शुल्क जमा कराने की मांग की है, जिसका विभाग के पास कोई बजट नहीं है।
नए शिक्षकों का वेतन अटका
सत्यापन न होने के कारण पुराने शिक्षकों का वेतन तो मिल रहा है, लेकिन नए शिक्षकों का वेतन पिछले 3 महीने से नहीं मिला है। मेरठ में ऐसे 50 से ज्यादा शिक्षक हैं। केके इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ वीर बहादुर सिंह ने बताया कि उनके विद्यालय में कार्यरत प्रवक्ता विकास और शाह नजर का सत्यापन अभी तक नहीं हुआ है, जिस कारण इनका पिछले 3 माह से वेतन नहीं मिला है।
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शासन को दे दी है सूचना
सत्यापन से जुड़ी जानकारी शासन को दे दी गई है। उम्मीद है जल्द ही शासन स्तर से विश्वविद्यालयों को इस संबंध में पत्र जारी किया जाएगा। - गिरिजेश चौधरी, जिला विद्यालय निरीक्षक
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