गोशाला बनी गायों के लिए श्मशान, तीन और मौतें
मेरठ। आवारा घूमने वाले गोवंश को सुरक्षित स्थान पर रखने और समय पर चारे, पानी की सुविधा के लिए शासन के निर्देश पर महानगर और देहात में अस्थायी गोशाला खोली गई हैं। इन गोशालाओं में पर्याप्त सुविधा न होने के कारण प्रतिदिन गोवंश मर रहे हैं। अकेले सूरजकुंड स्थित गोशाला में अब तक आठ गोवंश की मौत हो चुकी है, जबकि आधा दर्जन गोवंश बीमार हैं। मंगलवार को दिन निकलते ही तीन गोवंश की मौत हो गई।
खुले आसमान के नीचे कैसे बचेंगे गोवंश
सूरजकुंड वाहन डिपो परिसर में संचालित गोशाला बगैर छत की है। यहां 100 से अधिक गोवंश कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं। हाड़ कांपने वाली ठंड के बाद गोवंश को ठंड से बचाने के लिए व्यवस्था नहीं की जा रही है।
बिजली चोरी कर हो रहा वेल्डिंग का कार्य
गोशाला में टिन शेड डालने के लिए नगर निगम ने ठेका दिया हुआ है। ठेकेदार बिजली चोरी करके गोशाला में वेल्डिंग का कार्य करा रहा है, साथ ही अपने भी गेट आदि बनाने का काम कर रहा है। इसकी पोल मंगलवार को उस समय खुली जब भाजपा के पार्षद अंश्ुाल गुप्ता, विपिन जिंदल, संदीप रेवडी, राजेश रोहेला आदि गायों के मरने की सूचना पर गोशाला पहुंचे। उन्होंने देखा कि ठेकेदार ने सड़क से गुजर रहे तारों से कटिया डाली हुई थी। पार्षदों ने गोशाला में अव्यवस्थाओं का आरोप लगाते हुए हंगामा भी किया।
चारे, पानी व्यवस्था पर सवाल
सूरजकुंड वाहन डिपो, कांजी हाउस और परतापुर में गोशालाओं में 370 गोवंश बताए गए हैं। इनको चारे, पानी के लिए केवल छह लोग लगे हुए हैं, जो कम हैं। नगर निगम प्रशासन भले ही पर्याप्त चारा पानी दिए जाने की बात कर रहा हो, लेकिन सच्चाई सभी के सामने है।
30 रुपये में कैसे भरेगा पेट
सरकार द्वारा एक गाय के चारे पर खर्च होने वाली धनराशि केवल 30 रुपये रखी गई है, जो पर्याप्त नहीं है। निगम प्रशासन से जानकारी मिली है कि शासन को इसकी रिपोर्ट भेजी गई है। जैसा आदेश आएगा उसी के अनुरूप कार्य होगा।
फिर डलनी शुरू हुई तिरपाल
अस्थायी गोशाला पर लोहे की चादर न डलने के कारण अब नगर निगम प्रशासन ने फिर से तिरपाल डलवाने का निर्णय लिया है। एक ठेकेदार ने दोपहर बाद ही गोशाला पर तिरपाल डालनी शुरू कर दी। ताकि ठंड से गायों को राहत मिल सके।
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कराया जा रहा उपचार
बारिश के दौरान पहले डाली गई तिरपाल उड़ गई थी, अब फिर से तिरपाल डलवाई जा रही है। जिन गायों की अब तक मौत हुई है वह पहले से ही बीमार चल रही थीं। पशु चिकित्सकों ने भी उनके बीमार होने की रिपोर्ट दी है। जो गोवंश बीमार हैं उनका उपचार कराया जा रहा है। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त
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चारे, पानी नहीं है कमी
सभी व्यवस्था की जिम्मेदारी हमारी है। इनमें गोवंश के उपचार की जिम्मेदारी पशु चिकित्सकों की है। जो गाय मरी हैं उनका इलाज पशु चिकित्सक कर रहे थे। अभी कई गाय और बछड़े बीमार हैं। उनका इलाज भी चल रहा है। चारे व पानी की कोई कमी नहीं है। -राकेश गौड, प्रबंधक महिला विकास क्लब