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रिफंड के फेर में अटके करोड़ों रुपये, कारोबार प्रभावित

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मेरठ। एक तरफ जीएसटी काउंसिल ने 88 वस्तुओं का टैक्स स्लैब घटाकर लोगों को राहत दी है। लेकिन रिफंड समय पर न मिलने से कारोबारी परेशान हैं। महानगर के सैकड़ों व्यापारी ऐसे हैं, जिनके करोड़ों रुपये अटके हुए हैं। वाणिज्य कर और सेंट्रल जीएसटी ऐसे व्यापारियों की सूची और उनके बचे हुए रिफंड का खाका तैयार कर रहा है।
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जीएसटी लागू हुए एक साल से ज्यादा हो गया है। इस एक साल के दौरान मेरठ के व्यापारियों ने जीएसटी के टैक्स में एक हजार करोड़ से ज्यादा बढ़ोतरी भी की है। 20 हजार से ज्यादा नए व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत हुए हैं। बावजूद इसके व्यापारी अभी भी इसकी परेशानी झेल रहे हैं। इसमें सबसे अहम वजह वस्तु के उत्पादन के लिए पहले से दिए गए टैक्स का रिफंड समय पर नहीं मिलना है, जिसमें कोई सुधार नहीं हो रहा है। इसके लिए पिछले दिनों रिफंड पखवाड़ा भी मनाया गया था। मगर खामियों और पेचीदगियों की वजह से हर कोई इसका लाभ नहीं उठा सका। सेंट्रल जीएसटी और वाणिज्य कर कार्यालय के अधीन आने वाले रिफंड फंसे हुए हैं।
सरकार की ओर से दिया जाता है रिफंड
व्यापारी जिस टैक्स का भुगतान कर चुके होते हैं, वस्तु की बिक्री के बाद उसका रिफंड सरकार की ओर से दिया जाता है। यह रिफंड इनपुट टैक्स क्रेडिट और इंटीग्रेटेड जीएसटी के रूप में होता है। जीएसटी में कारोबारियों की सबसे बड़ी परेशानी रिफंड का न मिलना है। सैकड़ों कारोबारियों का रिफंड कई महीने से अटका हुआ है, जबकि व्यवस्था यह है कि 90 फीसद रिफंड सात दिन के भीतर जारी किया जाना चाहिए, जिस पर अमल नहीं हो रहा है।
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छोटे कारोबारी ज्यादा परेशान
रिफंड न मिलने से छोटे कारोबारी ज्यादा परेशान हैं। इससे कारोबारी की कार्यशील पूंजी पर फर्क पड़ रहा है। नया उत्पादन करने के लिए कारोबारियों को अतिरिक्त धन की व्यवस्था करनी पड़ रही है। धन की व्यवस्था करने के लिए कोई लोन के लिए चक्कर लगा रहा है तो कोई माल उधार ले रहा है। दरअसल रिफंड पाने के लिए निश्चित अवधि में आवेदन करने की बाध्यता भी है। बड़ी संख्या में छोटे कारोबारी इस अवधि में आवेदन ही नहीं कर पाते हैं।
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सबसे ज्यादा मैन्यूफैक्चर्स परेशान
जीएसटी के बाद रिफंड लेने में सबसे ज्यादा दिक्कत मैन्यूफैक्चर्स को आ रही है। टैक्स से ज्यादा रिफंड होता है, जिसे देने से विभाग बच रहे हैं। एक्ट का अड़ंगा लगा रहे हैं। पिछले टैक्स वैट के कागज मांग रहे हैं। इसमें व्यापारियों की बड़ी धनराशि फंसी हुई है। इस संबंध में जल्द ही एडिशनल कमिश्नर से मिला जाएगा। -नवीन गुप्ता, अध्यक्ष, संयुक्त व्यापार संघ
हो रही परेशानी
रिफंड न मिलने के कारण व्यापारियों को परेशानी हो रही है। एक हजार रुपये से जिनके कम रिफंड हैं, उन्हें रिफंड मिलना मुश्किल बताया जा रहा है। -रजनीश कौशल, दवा व्यापारी
सही फार्म न भरना भी वजह
रिफंड के लिए व्यापारियों द्वारा सही से फार्म न भर पाना भी वजह है। सीए या अधिवक्ता के माध्यम से रिफंड फार्म भरवाने से रिफंड मिलना आसान हो जाता है। -गौतम मलिक, अधिवक्ता
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ऑनलाइन किया गया सिस्टम
काफी व्यापारियों का रिफंड रुका हुआ है। रिफंड के सिस्टम को ऑनलाइन कर दिया गया है, ताकि लोगों को परेशानी न हो। हर खरीद पर इनपुट मिलता है, जिसका जितना इनपुट होगा उसे उतना ही रिफंड भी ज्यादा बनता है। व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। -वीएन सिन्हा, एडिशनल कमिश्नर, वाणिज्य कर
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