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कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही 45 दिन में शुरू होगा काम

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कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही 45 दिन में शुरू हो जाएगा रैपिड पर काम
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। जैसे ही कैबिनेट की मंजूरी होगी, 45 दिन के भीतर रैपिड ट्रेन पर काम शुरू हो जाएगा। मेरठ की सीमा में काम जून 2023 में शुरू होकर जून 2024 में पूर हो जाएगा। शनिवार को आयोजित बैठक में आयुक्त अनीता सी. मेश्राम ने इस जानकारी के साथ पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा की। कहा कि प्रदेश व केन्द्र सरकार ने जनपद को मेट्रो व आरआरटीएस की सौगात दी है, जिस पर गंभीरता से काम शुरू होना है।
24 जुलाई को लखनऊ में मुख्य सचिव को रैपिड ट्रेन की समीक्षा बैठक होनी है। इसी की तैयारियों को लेकर आयुक्त सभागार में इसकी कार्य प्रगति की बैठक हुई। अध्यक्षता करते हुए आयुक्त अनीता सी. मेश्राम ने कहा कि आरआरटीएस भारत में अपनी तरह की पहली क्षेत्रीय रेल सेवा लेकर आ रहा है। जोकि दिल्ली से मेरठ तक होगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में 250 करोड़ रुपये व केन्द्र सरकार ने 659 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। आरआरटीएस की डीपीआर डीएमआरसी द्वारा बनाई गई, जिसको मई 2017 में प्रदेश सरकार ने स्वीकृत किया। वर्तमान में यह केंद्र सरकार में जमा की जा चुकी है तथा पीआईबी (प्रेस इंफॉरमेशन ब्यूरो) स्टेज में है। इसकी बैठक अगस्त के प्रथम सप्ताह में अपेक्षित है। पीआईबी के बाद यह कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी। आयुक्त के मुताबिक कैबिनेट की स्वीकृति के 45 दिन के अंदर कार्य प्रारंभ करने का आश्वासन एनसीआरटीसी द्वारा दिया गया है। कहा कि अधिकारी आपस में समन्वय कर प्रोजेक्ट को गति दें तथा एनएच 58 में कांवड़ यात्रा सुगमता से सम्पन्न हों इसके लिए तैयारी करें तथा चौड़ीकरण के कारण यात्रा में कोई परेशानी न हो यह भी सुनिश्चित करें।
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160 की स्पीड से चलेगी ट्रेन
एनसीआरटीसी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुधीर कुमार शर्मा ने बताया कि मेट्रो के दो कॉरीडोर होंगे। परतापुर से मोदीपुरम तक प्रथम कॉरीडोर तथा श्रद्धापुरी से बेगमपुल होते हुए जागृति विहार एक्सटेशन तक द्वितीय कॉरीडोर होगा। आरआरटीएस की डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा होगी तथा वह 160 किमी प्रति घंटा तक चलेगी तथा औसत गति 100 किमी प्रति घंटा होगी। इसकी गति मेट्रो की गति से तीन गुनी होगी। आरआरटीएस 80 प्रतिशत एलीवेटिड व 20 प्रतिशत अंडरग्राउड होगी।

सपोर्टिंग काम हो रहा तेजी से
सुधीर कुमार शर्मा के मुताबिक आरआरटीएस पर साहिबाबाद से दुहाई तक कुल 16.5 किमी पर दो पैकेज में कार्य किया जाएगा। जिस पर टेंडर आमंत्रित किए जा चुके हैं। बेगमपुल पर इंटरचेज होगा तथा परतापुर व मोदीपुरम के बीच मेट्रो यात्रियों को दिल्ली जाने के लिए आरआरटीएस उपलब्ध होगी। परतापुर से मोदीपुरम कुल 18 किमी कुल 15 मिनट में तय होगा। परतापुर से मोदीपुरम तक मेट्रो व आरआरटीएस एक ही एलाइमेंट में होने से इसकी लागत में 6500 करोड़ रुपये की कमी आएगी। इसकी कुल दूरी 90 किमी होगी जोकि 62 मिनट का सफर होगा तथा दिल्ली के सराय काले खां से परतापुर मेरठ तक का सफर 50 मिनट में तय होगा।

छह कोच लगेंगे
प्रथम फेस में छह कोच लगाए जाएंगे तथा बाद में इसकी संख्या 12 कर दी जाएगी। इसमेें 2 हजार से ज्यादा लोग एक साथ सफर कर सकेंगे। आरआरटीएस के लिए एशियन डेवलेपमेंट बैंक (एडीबी) से 60 प्रतिशत ऋण, 20 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा व शेष 20 प्रतिशत उत्तर प्रदेश व दिल्ली सरकार द्वारा दिया जाएगा।


चार राज्यों में हो रहा काम
सीपीआरओ के मुताबिक (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम) चार राज्यों, दिल्ली उत्तर प्रदेश, हरियाणा व राजस्थान में कार्य कर रहा है। चारों प्रदेशों में प्रत्येक की इसमें इक्युटी 12.5 प्रतिशत है, तथा 50 प्रतिशत केन्द्र सरकार का है। एनसीआरटीसी के 08 कॉरीडोर हैं, जिसमें प्रथम चरण में तीन कॉरीडोर जिसमें दिल्ली सें मेरठ 90 किमी प्रथम कॉरीडोर, दिल्ली से गुरुग्राम होते हुए अलवर राजस्थान तक 180 किमी का द्वितीय कॉरीडोर तथा दिल्ली से सोनीपत होते हुए पानीपत तक 111 किमी का तृतीय कॉरीडोर होगा। यह कार्य वर्ष 2032 में ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।

ये रहेंगी खासियत
आरआरटीएस में हाई स्पीड कनेक्टिविटी, हाई फ्रीक्वेंसी, हाई कैपेसिटी, तुलनात्मक वहन किये जा सकने वाला किराया, रेडयूसड कंजेक्शन एवं पॉल्यूशन, यूजर फ्रेंडली इंफॉरमेशन सिस्टम, मल्टी मॉडल इंटीग्रेशन, सेफ ट्रेवल व सभी मौसम में आरामदायक व भरोसेमंद सफर रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि आरआरटीएस में सभी कोच ऐसी होंगे तथा दिव्यांगों के लिए भी व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी। आरआरटीएस के कोच की डिजाइन स्पेनिस एवं फ्रेंच कंपनी एकोम व इनिका के गठबंधन द्वारा की जा रही है।

अपने यहां यह आएगा वित्तीय भार
इस प्रोजेक्ट पर करीब 32 हजार करोड़ रुपये का कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडीचर) आएगा, जिसमें 20 प्रतिशत राज्य सरकारों (दिल्ली व उत्तर प्रदेश), 20 प्रतिशत केंद्र सरकार तथा 60 प्रतिशत ऋण एडीबी या अन्य वित्तीय संस्थानों से लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार को 5828 करोड़ रुपये, दिल्ली सरकार को 1138 करोड़ व केंद्र सरकार को 5686 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आयेगा। अगले 50 वर्ष के ट्रैफिक को ध्यान में रखकर आरआरटीएस पर कार्य चल रहा है। इसके लिए परतापुर से मोदीपुरम तक अब 06 के स्थान पर 12 स्टेशन होंगे। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए भूमि या जो लीज पर ली जाएगी या सबऑर्डिनेट लैंड होगी। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए वन, सिंचाई, बिजली, जीडीए, एमडीए, स्पोर्ट्स अथॉरिटी, लोनिवि विभागों से एनओसी प्राप्त की गई हैं तथा प्रोजेक्ट की जियो टेक्नीकल इन्वेस्टीगेशन आधार पूर्ण किया जा चुका है।

ये हुए टेंडर
बिजली की फाइव लाइन के लिए टेंडर किये जा चुके हैं, जिसमें चार मुरादनगर व एक गाजियाबाद में है तथा अर्थला गाजियाबाद में ईएचटी लाइन के लिए पुन: सर्वेक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 386 पेड़ हटाने के लिए वन विभाग से एनओसी प्राप्त की गई, नगर निगम से समन्वय कर प्राप्त की जाएगी। 80 हजार वर्ग मीटर के कास्टिंग यार्ड बनाया जाना है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण विभाग से 2006 के नोटीफिकेशन के बाद रेल प्रोजेक्ट के लिए एनओसी की आवश्यकता नहीं होती है।
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40 किमी का होना है चौड़ीकरण
डीएम अनिल ढींगरा ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए 40 किमी सड़क का चौड़ीकरण किया जाना है। जिसमें गाजियाबाद से दुहाई तक 14 किमी है तथा 135 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है जिसमें से 100.2 हेक्टेयर गाजियाबाद में व 35 हेक्टेयर मेरठ में प्रस्तावित है। इस अवसर पर उपाध्यक्ष एमडीए साहब सिंह, अपर आयुक्त जयशंकर दूबे, जीडीए के सचिव संतोष राय, अपर जिलाधिकारी एलए मेरठ ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, गाजियाबाद मदन सिंह, नगर आयुक्त मेरठ मनोज चौहान, गाजियाबाद चंद्र प्रकाश सिंह, अधीक्षण अभियंता लोनिवि गाजियाबाद ज्ञान गुप्ता, चीफ इंजीनियर विद्युत डिस्ट्रीब्यूशन एसबी यादव, सीटीपी जीडीए इश्तयाक, अहमद, एनसीआरटीसी के मुख्य परियोजना प्रबंधक आरके हुस्तु आदि मौजूद रहे।


अन्य तथ्य
दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक आरआरटीएस तथा मेरठ शहर मे दो कॉरीडोर पर मेट्रो चलेगी।
आरआरटीएस की कुल लंबाई 90 किमी होगी।
22 स्टेशन हाेंगे तथा यह दूरी 62 मिनट में तय होगी।
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