मेरठ। कुट्टू सेहत के लिए फायदेमंद है। इसे जड़ी बूटी भी कहते हैं। लेकिन अगर इसके इस्तेमाल में सावधानी न बरती जाए तो यह ‘जहरीला’ भी हो जाता है। इससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा रहता है।
कु्टू पौधे के सफेद फूल से निकलने वाले बीज को पीसकर इसका आटा तैयार किया जाता है, जिसे आमतौर पर लोग कुट्टू का आटा बोलते हैं। इसे खासतौर पर व्रत में इसलिए इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह न तो अनाज है और न ही वनस्पति। वनस्पति विज्ञान के मुताबिक यह पॉलीगोनाइसी फैमिली का होता है। अंग्रेजी में कुट्टू को बकव्हीट कहते हैं। इसे ब्लड प्रेशर, मधुमेह आदि दवाओं में भी इस्तेमाल किया जाता है।
दरअसल, नमी के संपर्क में आने पर इस आटे में रासायनिक क्रियाएं होती हैं और यह जहरीला बन जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि कुट्टू का आटा गर्म प्रकृति का होता है। इससे शरीर में कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज का स्तर बढ़ता है। कुट्टू में वसा अधिक होती है। इसका सावधानी से प्रयोग किया जाना चाहिए। इसके आटे का प्रयोग अधिकतम एक माह तक प्रयोग में किया जाना चाहिए। जहां तक हो सके, ताजा आटा ही प्रयोग करना चाहिए। पुराने आटे में बैक्टीरिया और फंगस लग जाते हैं। कुट्टू का आटा ज्यादा दिन रखे हुए होने की स्थिति में माइक्रोटॉक्सिन का निर्माण हो जाता है जो कि शरीर के लिए हानिकारक है। खराब कुट्टू के खाने से उल्टी के साथ चक्कर आने लगते हैं। बेहोशी भी आ सकती है। शरीर ढीला पड़ने लगता है। ज्यादा दिनों तक रखे कुट्टू के आटे से बने पकवान खाने से लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार होते हैं।
फलाहार उत्तम
नवरात्र में तली भुनी चीजों से पहरेज करना चाहिए। कुट्टू का आटा गर्म होता है, इस कारण कई बार परेशानी हो जाती है। नवरात्र में फलाहार ही ज्यादा करना चाहिए। -डॉ. तनुराज सिरोही, फिजिशियन
छापामारी करेंगे
छापामारी कर देखेंगे कि कोई काफी समय से रखा हुआ पुराना कुट्टू का आटा तो नहीं बेच रहा है। अगर ऐसा मिलता है तो इसके सैंपल लेकर कार्रवाई की जाएगी। -सर्वेश मिश्रा, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
खास बातें:
पुराना रखा हुआ आटा हो जाता है ‘जहरीला’
फूड प्वाइजनिंग का रहता है खतरा