मेरठ। पढ़ाई को लेकर स्टूडेंट्स का शेड्यूल एकदम बदल गया है। बोर्ड एग्जाम, साथ में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी। उससे पहले प्री बोर्ड। इस सब में स्टूडेंट्स इतने व्यस्त हो गए हैं कि अब उनके पास फालतू चीजों के लिए वक्त नहीं है। सुबह से शुरू होकर रात तक की दिनचर्या दिमाग और कागज में सेट है। पढ़ाई के लिहाज से यह क्वालिटी टाइम है। दबाव और तनाव से भी लड़ना है। ऐसे में स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहना जरूरी है। उसके लिए हेल्दी डाइट चाहिए। पैरेंट्स डाइटीशियन से हेल्दी डाइट को लेकर टिप्स ले रहे हैं। काउंसलर की मदद भी ले रहे हैं। दोनों विशेषज्ञ की राय स्टूडेंट्स के लिए अहम है।
तनाव से बढ़ जाता है वजन
डाइटीशियन डॉ. भावना गांधी का कहना है इस वक्त स्टूडेंट्स को फूड की डाइट और इमोशनल डाइट दोनों की आवश्यकता है। फिजिकल एक्टिविटी कम होने और तनाव की वजह से इन दिनों में छात्रों का वजन बढ़ जाता है। छात्रों के लिए मात्रा से अधिक क्वालिटी पर ध्यान दें। नाश्ता हेल्दी लें। प्रोटीन वाला प्रोडेक्ट जरूर हो। खाने में क्वालिटी के लिए कुछ प्रयोग कर सकते हैं। जैसे खिचड़ी में चावल की जगह दलिया, पनीर, सब्जी मिलाकर बना सकते हैं। दो-तीन मौसम के फल जरूर रखें। गाजर टमाटर चुकंदर के जूस में संतरा या मौसमी जरूर लें। इससे आयरन मिलेगा। आयरन दिमाग की शक्ति के लिए अच्छा है। सर्दी में जिनका मीठा खाने की आदत है। वह गुड़ ले सकते हैं। खाने के साथ एक गिलास मट्ठा जरूर दें। पढ़ाई के तनाव से गैस और कब्ज बनने की शिकायत रहती है। एनर्जी डिंक से बचें। पानी खूब पिएं। हरी पत्तेदार सब्जियां और कच्चा सलाद खाएं।
ड्राई फ्रूट का तरजीह दें।
डाइटीशियन अंशु मेहरा का कहना है दिमाग शरीर का दो प्रतिशत हिस्सा है लेकिन इसको ऊर्जा शरीर की 20 प्रतिशत चाहिए। पढ़ाई के दौरान इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। लिहाजा पौष्टिक खाने की आवश्यकता बढ़ जाती है। पौष्टिक खाने में ड्राई फ्रूट का तरजीह दें। सर्दी में जीरा का शहद में भूनकर ले सकते हैं। चाय और कॉफी ज्यादा पीने की आदत सही नहीं है। नींद से जागने के लिए इनको ज्यादा न लें। इससे दिमाग की शार्पनेस पर असर पड़ता है। पानी भरपूर मात्रा में लें। प्रोटीन का प्राथमिकता दें।
शरीर को आराम भी दें
कॅरियर काउंसलर डॉ. विक्रांत जावला का कहना है छात्र इस समय टाइट शेड्यूल में है। स्कूल रेग्युलर क्योंकि सिलेबस खत्म होना है। उसके बाद ट्यूशन है। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी भी साथ चल रही है। सेल्फ स्टडी करने का भी वक्त आ गया है। सुबह पांच साढ़े पांच बजे से लेकर रात 11 बजे तक का छात्रों ने टाइम सेट कर रखा है। छात्रों के लिए जरूरी है कि वह रिलेक्स जरूर हो। तनाव उन पर हावी तो नहीं हो रहा, पैरेंट्स इस बात का ख्याल रखें। आउटडोर एक्टिविटी करें, चाहे वह थोड़ी देर की ही क्यों न हो। मैनेजमेंट अच्छा हो गया तो सब अच्छा होगा।
टाइम मैनेजमेंट तैयार करें
कॅरियर काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट डॉ. मनीषा तोमर छात्रों के लिए इस वक्त चार बिंदु महत्वपूर्ण बताती हैं। उनका कहना है सबसे पहले स्टडी मैटीरियल मैनेज करें। उसके लिए एक टाइम मैनेजमेंट तैयार करें। सेल्फ स्टडी करें। पढ़ाई के दौरान मेमोरी को शार्प करने के लिए ट्रिक का इस्तेमाल कर सकते हैं। याद रखने के लिए चार्ट बना सकते हैं। उदाहरण या फनी चीजों से सवालों को जोड़ सकते हैं। क्योंकि पढ़ाई मेमोरी में स्टोर करनी है। ग्रुप डिस्कशन करना है तो एक चैप्टर को चार भागों में बांटकर अपने-अपने तरीके से उसे तैयार कर सकते हैं।