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इंडियन इकोनॉमिक्स एसोसिएशन के सम्मेलन में जुटेंगे विद्वान

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मेरठ। इंडियन इकोनॉमिक्स एसोसिएशन अपने 100 साल पूरे होने के अवसर पर तीन दिवसीय सम्मेलन करने जा रही है। इसमें देशभर के अर्थशास्त्री शामिल होंगे। बिहेवियर इकोनॉमिक्स, डब्लूटीओ और रूरल अर्बन डेवलेपमेंट पर चर्चा होगी। नोबेल पुरस्कार मिलने की वजह से इन दिनों बिहेवियर इकोनॉमिक्स विषय चर्चा में है। देशभर के विश्वविद्यालयों सम्मेलन को लेकर प्रचार किया जा रहा है।
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मंगलवार को यहां चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में इंडियन इकोनॉमिक्स एसोसिएशन के सचिव प्रो. डीके मदान ने प्रेस वार्ता में कहा कि एसोसिएशन की स्थापना को 100 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर राजस्थान के जोधपुर में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय सम्मेलन 27 से 29 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें 500 से अधिक अर्थशास्त्र से जुड़े लोग शामिल होंगे। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अतिथि होंगे। कई बड़े राजनेता और अन्य हस्ती होंगे। नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी सम्मेलन को संबोधित करेंगे। देश के सभी राज्यों का सम्मेलन में प्रतिनिधित्व होगा। प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड इकोनॉमिक्स एसोसिशन के सचिव प्रो. एसके मिश्रा, प्रो. सुधीर शर्मा, प्रो. आरपी जुयाल, डॉ. दिनेश कुमार मौजूद रहे।

2022 तक कृषि आय दोगुनी होनी मुश्किल
केंद्र सरकार का यह संकल्प की 2022 तक किसानों की आय दोगुनी की जाएगी पर अर्थशास्त्र के जानकारों का कहना है यह मुश्किल है। प्रो. मदान ने कहा आय दोगुनी करने के लिए पांच साल तक आय में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होनी चाहिए। यह हो नहीं रहा। नोटबंदी पर कहा कि कुछ सकारात्मक तो कुछ नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। पैसे की सप्लाई कम होने की वजह से ब्लैक मनी पर असर पड़ा। बचत हुई और टैक्स अधिक आया। जीडीपी ग्रोथ पर विपरीत असर पड़ा। यह गिरी है। चार पांच साल में नोटबंदी का व्यापक असर पता चलेगा।
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