शौर्य का पर्याय चार्जिंग रैम मनाएगी एक को स्थापना दिवस
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
शौर्य और साहस का पर्याय सेना की चार्जिंग रैम डिविजन एक सितंबर को अपना 38वां स्थापना दिवस मनाएगी। सेना की यह डिविजन अपने पराक्रम के लिए जानी जाती है। पाकिस्तान सेना को पछाड़ना हो या सिविल के उपद्रव को नियंत्रित करना। इस सब में चार्जिंग रैम का सराहनीय कार्य रहा है। अपने शहीदों को श्रद्धांजलि देने के अलावा अपने साहसिक सफर को एक सितंबर को डिविजन याद करेगी।
एक सितंबर 1979 में चार्जिंग रैम डिविजन की स्थापना हुई थी। सेना की यह स्ट्राइक कोर है। मुख्य मुकाबले में सबसे आगे रहने वाली डिविजन का सिंबल रैम भी अटैक का प्रतीक है। दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने वाली यह इंफ्रेंट्री सेना का गर्व है। मेरठ में मौजूद डिविजन अपना स्थापना दिवस मनाएगी। शहीदों को श्रृद्धांजलि दी जाएगी। पंजाब में ऑपरेशन रक्षक में चार्जिंग रैम का महत्वपूर्ण योगदान रहा और सम्मान हासिल किया। इसी तरह 2001-2002 में ऑपरेशन पराक्रम में अद्भुत साहस का परिचय दिया। वहीं 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों को शांत करने में चार्जिंग रैम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। जब कई जिले दंगे की आग में झुलस रहे थे तो सेना की टुकड़ी ने पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में किया। क्षेत्र में शांति स्थापना करने में मदद की। इसी तरह हरियाणा में 2016 में जाट आरक्षण को लेकर भड़की हिंसा को काबू करने में भी 22 डिविजन का अहम योगदान रहा। सूचना मिलते ही रिकॉर्ड टाइम में मौके पर पहुंचकर एक्शन लिया। डिविजन की खासियत तेजी से मूव कर अपनी पॉजिशन लेने की भी है।
खास बात
एक सितंबर 1979 में हुई थी चार्जिंग रैम डिविजन की स्थापना