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मेरठ से मिलेगी सेना को नई दिशा और नई ताकत

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मेरठ से मिलेगी सेना को नई दिशा और ताकत
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मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे की कनेक्टिविटी की खबर के साथ
- प्रशिक्षण मुख्यालय बनने के बाद देश-दुनिया में मशहूर होगी छावनी
- देश की 62 छावनियों में अलग रहेगा रुतबा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। 1857 की क्रांति का शहर मेरठ दुनिया की सबसे बड़ी फौज का प्रशिक्षण मुख्यालय बनने के बाद देश ही नहीं दुनिया में भी मशहूर होगा। देश के 32 ए श्रेणी के शिक्षण प्रतिष्ठानों के साथ ही देशभर में सेना की ट्रेनिंग में बदलाव से लेकर नई पॉलिसी यहीं से तय होगी। सेना के जवानों की ट्रेनिंग को और ज्यादा प्रभावशाली बनाने से लेकर सेना प्रशिक्षण और युद्ध से जुड़ी विभिन्न नीतियां बनाने में भी सेना का प्रशिक्षण कमान मुख्यालय ही निर्णय देगा।
भारतीय सेना के पास एक रेजिमेंटल प्रणाली है जो विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और संचालन के आधार पर सात कमानों में विभाजित है। प्रत्येक कमान (कमांड) लेफ्टिनेंट जनरल के पद के साथ जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के नियंत्रण में होती है। देश में छह संचालन और एक प्रशिक्षण कमांड हैं। प्रत्येक सेना कमान सीधे नई दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय से संबद्ध है। देश की इन सात कमानों में प्रशिक्षण मुख्यालय सबसे अहम है। पूरे देश में 32 ए श्रेणी के शिक्षण प्रतिष्ठानों जिनमें आईएमए, एनडीए शामिल हैं। कॉर्प्स बैटल स्कूल में होने वाली विशेष ट्रेनिंग का पूरा खाका भी यहीं से तय होता है। सभी यूनिटों के ट्रेनिंग सेंटर को निर्देश भी प्रशिक्षण मुख्यालय से ही दिए जाते हैं। सेना की तमाम यूनिटों में चलने वाले ट्रेनिंग सेंटर और ट्रेनिंग के लगातार बदलते स्वरूप को लेकर पॉलिसी भी यहीं से बनाकर भेजी जाती है। प्रशिक्षण मुख्यालय होने के कारण दूसरे देशों के ऑफिसर की ट्रेनिंग और दूसरे मामलों के चलते उनका आना-जाना रहता है।
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हाल ही में सेनाध्यक्ष आए थे मेरठ
देश की 62 छावनियों में मेरठ बेहद अहम है। यहां पर सेना के पास जमीन की भी कोई कमी नहीं है। दिल्ली के सबसे नजदीक है। कुछ दिन पहले ही सेनाध्यक्ष बिपिन रावत मेरठ आए थे। जनरल रावत ने घंटों चले निरीक्षण के दौरान फॉॅर्मेशन के युद्ध संबंधी तत्परता की समीक्षा और युद्ध संबंधी तैयारियों, वर्तमान सुरक्षा स्थिति तथा फॉर्मेशन के विशेष प्रशिक्षण के बारे में बात की थी।
सेना के पुनर्गठन की चल रही कवायद
सेना के पुनर्गठन को लेकर सैन्य अफसर लगातार अध्ययन करते रहे हैं। इस कड़ी में पूरी कवायद चल रही है। इसमें ब्रिगेडियर के पद को खत्म करने के साथ ही सैन्य बल को घटाने और सैनिकों को विशेष प्रशिक्षण एवं हथियारों की खरीद को लेकर सर्र्वोच्च जनरलों के नेतृत्व में अध्ययन हो रहा है। इसी के तहत दिल्ली सेना मुख्यालय के नजदीक होने की वजह से मेरठ छावनी को इसके लिए चुना गया है।
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सात कमान और उनके मुख्यालय
प्रशिक्षण कमान
मुख्यालय: शिमला, हिमाचल प्रदेश
सेना का प्रशिक्षण कमान मुख्यालय इस समय शिमला, हिमाचल प्रदेश में है। इसे एआरटीआरएसी के रूप में भी जाना जाता है। आर्मी ट्रेनिंग कमांड 1 अक्टूबर 1991 को स्थापित की गई थी। यह पहले मध्य प्रदेश के महू क्षेत्र में स्थित था। लेकिन सन 1993 में हिमाचल प्रदेश के शिमला में स्थानांतरित कर दिया गया। कमांड का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ ही प्रशिक्षण की कार्य साधकता बढ़ाने और तमाम पॉलिसी तय करना है।
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सेंट्रल कमांड
मुख्यालय: लखनऊ, उत्तर प्रदेश
लखनऊ में स्थित सेंट्रल कमांड की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के समय 1942 में हुई थी। 1946 में इसे बर्खास्त कर दिया गया। चीन-भारतीय युद्ध के कारण 1 मई 1963 को फिर से इसे स्थापित किया गया।
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पूर्वी कमान
मुख्यालय: कोलकाता, पश्चिम बंगाल
भारतीय सेना के पूर्वी कमान का गठन 1920 में हुआ था। उस समय सेना के दक्षिणी कमान, पूर्वी कमान, उत्तरी कमान और पश्चिमी कमान थे। 1 मई 1963 तक लखनऊ को पूर्वी कमान के मुख्यालय के रूप में चुना गया था। जब सेंट्रल कमांड को फिर से स्थापित किया गया तब लखनऊ को पूर्वी कमान के बजाय सेंट्रल कमांड का मुख्यालय बनाया गया था। पूर्वी कमान का मुख्यालय कोलकाता पश्चिम बंगाल में है।
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उत्तरी कमान
मुख्यालय: उधमपुर, जम्मू और कश्मीर
भारतीय सेना में उत्तरी कमान सबसे पुरानी कमांड में से एक है। यह मूल रूप से ब्रिटिश शासन के समय 1895 में स्थापित की गई थी। 1942 में कोहट, बलूचिस्तान, पेशावर, वजीरिस्तान और रावलपिंडी जिले सहित क्षेत्र उत्तरी कमान के नियंत्रण में थे। 1947 में उत्तरी कमान का मुख्यालय पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय बन गया। उत्तरी कमान को भारत की स्वतंत्रता के बाद 1947 में हटा दिया गया था। जब भारत सरकार ने उत्तरी सीमाओं में संचालन की देखरेख के लिए एक अलग कमान बनाने का फैसला किया तो 1972 में कमान में सुधार किया गया।
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दक्षिणी कमान
मुख्यालय: पुणे, महाराष्ट्र
दक्षिणी कमान की स्थापना 1895 में की गई थी। यह 1942 में ब्रिटिश द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दक्षिणी सेना के रूप में फिर से बनाया गया था। कमांड का गठन नवंबर 1945 में मूल नाम दक्षिणी कमान के साथ फिर से वापस कर दिया गया। दक्षिणी कमान ने आधुनिक भारत में विभिन्न रियासतों के एकीकरण, 1961 में गोवा के भारतीय उद्घोषण और 1965 और 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्धों के दौरान भारत में होने वाली विभिन्न महत्वपूर्ण घटनाओं के दौरान अनुयोजन देखा गया।
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दक्षिण पश्चिमी कमान
मुख्यालय: जयपुर, राजस्थान
15 अप्रैल 2005 को गठित भारतीय सेना की दक्षिण पश्चिमी कमान 15 अगस्त 2005 को पूरी तरह से चालू हो गई। यह भारतीय सेना में सबसे नई गठित कमांड है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित इस कमान में कुछ परिचालन इकाइयां हैं जिन्हें पश्चिमी कमान से स्थानांतरित किया गया था।
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पश्चिमी कमान
मुख्यालय: चंडी मंदिर, चंडीगढ़
भारतीय सेना के पश्चिमी कमान को 26 अक्टूबर 1947 को प्रभावी बनाया गया था। जम्मू और कश्मीर के विलय के बाद पश्चिमी कमान के क्षेत्र को जब्त करने के लिए भारतीय सेना को संचालन की जिम्मेदारी लेने का कार्य सौंपा गया था।
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