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निगम कोष को नुकसान, ऑनलाइन नहीं की दुकान

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- 70 दुकानों का 14 साल से किराया नगर निगम कोष में नहीं कराया गया जमा
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- आदेश के बाद भी संपत्ति को नहीं किया गया ऑनलाइन, निगम को रहा नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। नगर निगम की दुकानों से किराया वसूली में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए दुकान और अन्य संपत्ति को नगर निगम अधिकारी ऑनलाइन करना भूल गए। इसका फायदा निगम की सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने वालों को पहुंच रहा है। निगम प्रशासन ने अभी तक 70 दुकानदारों में से एक को भी नोटिस नहीं दिया है। इससे सीधे-सीधे निगम कोष को नुकसान पहुंच रहा है।
नगर निगम मुख्यालय के बाहर और अन्य स्थानों पर नगर निगम की 70 ऐसी दुकानें हैं जिनसे 14 साल से किराया नहीं लिया जा रहा है। जिसका खामियाजा नगर निगम को भरना पड़ रहा है। जहां सरकारी राजस्व की हानि हो रही है, वहीं दुकानों पर अवैध कब्जा ही माना जा रहा है। सभी दुकानों को रोड पटरी में दर्शाकर पूरा खेल किया गया है। इन दुकानों से किराया वसूली न करने से 14 साल में नगर निगम के खजाने को दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। तीन माह पहले इस पूरे मामले का खुलासा हुआ था। उसके बाद भी अभी तक नगर निगम प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है।
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शहरभर में हैं निगम की मार्केट
शहरभर में नगर निगम की मार्केट हैं। इनमें कम से कम नगर निगम की एक हजार से अधिक दुकानें हैं। प्रतिवर्ष दुकानों के किराए में बढ़ोत्तरी का प्रावधान है। शहर में भगत सिंह मार्केट, बच्चा पार्क, नगर पालिका मार्केट, नगर निगम मार्ग पर मार्केेट, जेल चुंगी, सूरजकुंड, देहली गेट चौराहा मार्केट सहित विभिन्न स्थानों पर निगम की दुकानें हैं। निगम एक्ट के मुताबिक नगर निगम दुकानों को किराए पर दिया जाता है। इन दुकानों का किराया नगर निगम कोष में आना चाहिए। लेकिन इनमें से 70 दुकानों का किराया जमा नहीं कराया जा रहा है।
आदेश पर कार्रवाई कराना भूले निगम अधिकारी
नगर निगम के अधिकारियों ने निगम की संपत्ति किराया में लाखों के नुकसान को रोकने के लिए संपत्ति को अभिलेखों को दुरुस्त कराने और समस्त दुकान आदि संपत्तियों को ऑनलाइन कराने का निर्णय लिया था। अपर नगरायुक्त अमित सिंह ने किराया विभाग के लिपिकों को निगम की संपत्तियों का लेखाजोखा ऑनलाइन करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस पर अभी तक अमल नहीं हो सका।
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ऑनलाइन कराया जाएगा
चुनाव में व्यस्तता के कारण इस विषय पर बात नहीं हो पाई थी। अब किराया विभाग से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यह निगम की संपत्ति से जुड़ा मामला है। सभी दुकानों को ऑनलाइन कराया जाएगा। -अमित सिंह, अपर नगरायुक्त
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