फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बचत की खबरें

विज्ञापन
विज्ञापन
शाखाओं के अनुशासन ने खड़ा किया ‘संगठन’
विज्ञापन

मेरठ।
शाखाओं के अनुशासन ने आज राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का ऐसा संगठन खड़ा किया, जो सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक में पहुंच गया। जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर 89 वर्षीय इंद्रसैन माहेश्वरी आजादी से पहले के कुछ पलों को याद कर भावुक हो गये। उन्होंने कहा कि जो अनुशासन शाखाओं में सिखाया गया था, आज उसी का परिणाम है कि इतना बड़ा जन सैलाब यहां उमड़ा हुआ है। बच्चों से लेकर 90 साल के वृद्ध भी राष्ट्रोदय के एतिहासिक पल के गवाह बने।
जागृति विहार विस्तार योजना पर आयोजित आरएसएस के राष्ट्रोदय कार्यक्रम में साहिबाबाद के राजेंद्रनगर सेक्टर-3 निवासी 89 वर्षीय इंद्रसैन माहेश्वरी भी पहुंचे। वह कई साल तक विभाग संचालक के पद पर भी रहे हैं। उन्होंने बताया कि 12 साल की उम्र में पढ़ाई के दौरान संघ की शाखाओं में जाना शुरू किया था। उस समय संघ की शाखाएं बहुत कम थीं। संचार का कोई साधन नहीं था। स्कूल के एक शिक्षक पढ़ाई के दौरान संघ के बारे में बताते थे। उसके बाद शाखाओं में जाना सीखा। बाद में स्कूल के बहुत बच्चे जुड़ गये। शाखाओं में जब जाते थे तो सुबह चार बजे ही उठकर स्नान करते थे। वहां गुरुजी यही सिखाते थे कि आने वाले समय में यह अनुशासन ही हमें ऊंचाईयों तक पहुंचाएगा।
विज्ञापन

आगे बढ़ना है तो संगठित हो
1940 के दशक में जब देश आजादी पाने के लिए लड़ रहा था तो संघ के कार्यकर्ताओं में बहुत जोश भरा होता था। सैकड़ों कार्यकर्ता स्कूल में ही शाखा लगाते थे। बाद में पता चला कि संघ पर बैन लगा दिया गया है। इस पर हमने नारेबाजी और हंगामा किया। उस समय सिखाया जाता था कि देश में आगे बढ़ना है तो संगठन को मजबूत करो। अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ो। आजादी मिली तो संघ की शाखाएं बढ़ती गईं। नागपुर और केरल में बड़े आयोजन किए गए। 1970 में संघ ऐसा संगठन खड़ा कर चुका था, जिसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उस समय के अनुशासन ने ही इस संगठन को ऊंचाईयों तक पहुंचाया। पिछले दो माह से जो तैयारी राष्ट्रोदय समागम की थी, आज उसी का नतीजा है कि मेरठ में संघ का यह एतिहासिक दिन देखने मिला। जब झंडे के सामने इतने बड़े जन सैलाब ने प्रणाम किया।
अनुशासन ही संघ की शक्ति
गाजियाबाद से पहुंचे 72 वर्षीय कन्हैया सिंह तोमर ने बताया कि उन्होंने लीबिया में दो दशक से अधिक नौकरी की। लीबिया में कर्नल गद्दाफी ने अपना संगठन खड़ा किया था, जिसमें वह लंबे समय तक जुड़े रहे। उसके बाद उन्होंने सोचा जब वापस भारत लौटेंगे को संघ के लिए ही प्रचार करना है। 2004 में देश लौटने के बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत कई जगह संघ का प्रचार किया। नगर प्रभार प्रमुख का पद भी निभाया। संघ अनुशासन के लिए ही जाना जाता है। हाथरस से पहुंचे 69 वर्षीय राधेश्याम ने बताया कि यह बहुत उत्साह का कार्यक्रम है। राष्ट्रोदय के कार्यक्रम के लिए बहुत शक्ति लगाई है, उसी का नतीजा है कि आज इतने बड़े मैदान में एकत्र हुए। दिन रात एक करके यह कार्यक्रम सफल हुआ है।
विज्ञापन



नाइजीरिया से राष्ट्रोदय में शामिल होने आए भरत पांडे
नाइजीरिया में चला रहे संघ की शाखा, समागम में शामिल होने आए भारत
मेरठ। नाइजीरिया लेबोस में पिछले 10 साल से रह रहे भरत पांडे भी समागम का हिस्सा बने। पूर्ण गणवेश में उन्होंने राष्ट्रोदय में भाग लिया। भरत पांडे नाइजीरिया के लेबोस में आईटी कंपनी में नौकरी करते हैं। वह मूलत: शास्त्रीनगर निवासी हैं। उन्होंने बताया दस साल बाद भारत आने का मुख्य उद्देश्य केवल यह समागम है। लेबोस में आरएसएस की दो शाखाएं संचालित हैं। एक शाखा लेबोस मेन लैंड व दूसरी शाखा लेबोस विक्टोरिया आईलैंड में संचालित हैं। प्रति रविवार को सुबह शाखाएं लगती हैं। मैं दोनों शाखाओं में जाता हूं। पहली बार संघ संचालक को सुनने का अवसर मिला है। जब सूचना मिली कि स्वयं संघ संचालक स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे तो खुद को रोक नहीं पाए। इतने स्वयंसेवक एक साथ पहली बार देखे हैं। बहुत अच्छा लगा। भरत की पत्नी नीतू पांडे भी सेविका समिति में सक्रिय हैं।

खास बातें
89 वर्षीय इंद्रसैन माहेश्वरी बोले, जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर जन सैलाब भी देख लिया
12 साल की उम्र में शाखा से जुड़ा था, आजादी से पहले संघ पर बैन का दौर भी देखा
लीबिया में कर्नल गद्दाफी के नजदीकी रहे 72 वर्षीय कार्यकर्ता भी पहुंचे
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें