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मेरठ। इससे बड़ी विड़बंना क्या होगी कि कोई मरीज अस्पताल के दरवाजे पर बिना इलाज के ही दम तोड़ दे। मेडिकल कॉलेज में समय पर इलाज नहीं मिलने पर एक युवक ने स्ट्रेचर पर ही तड़प तड़पकर दम तोड़ दिया। परिवार वाले युवक की गंभीर हालत की दुहाई देते हुए डाक्टरों से एक बार देख लेने की गुहार लगाते रहे। डाक्टर परिजनों की गुहार पर नहीं पसीजे। वे नंबर से देखे जाने की बात कहकर उन्हें टरकाते रहे। परिजन काफी देर तक चिकित्सकों के सामने हाथ जोड़कर विनती करते रहे कि सुरेश की हालत बेहद खराब है। सुरेश की हालत लगातार बिगड़ती गई तो परिवार वाले डाक्टरों के पैर तक पकड़ने को तैयार हो गये। आधे घंटे बाद स्ट्रेचर पर पड़े पड़े युवक सुरेश ने तड़पते तड़पते दम तोड़ दिया। युवक की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया।
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शुक्रवार दोपहर कांशीराम आवासीय कॉलोनी निवासी 42 वर्षीय सुरेश को लेकर उसके परिजन मेडिकल कॉलेज में ओपीडी नंबर चार पर पहुंचे। परिवार के लोग मरीज को स्ट्रेचर पर भी स्वयं डालकर लाए। दिल की बीमारी से पीड़ित सुरेश लंबी-लंबी सांसे ले रहा था। उसके साथ आए तेज सिंह, संतोषी, कमला आदि ने ओपीडी नंबर चार में मरीजों को देख रहे चिकित्सकों से गुहार लगाई कि सुरेश की हालत काफी गंभीर है। कृपया इसको देख लीजिए। सुरेश की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। वहां मौजूद अन्य लोग भी आक्रोशित हो गए। सभी ने चिकित्सकों को जमकर खरी खोटी सुनाई। हंगामे की सूचना पर मेडिकल थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। वहीं प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी, डॉ. दिनेश राणा ने परिजनों को समझा बुझाकर शांत कराया। परिजनों ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों की लापरवाही के कारण सुरेश की मौत हुई है।
प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी का कहना है कि पूरे मामले की जानकारी की गई है। सुरेश के साथ आए लोगों ने अटेंडेंट को गंभीर बीमार होने की सूचना नहीं दी थी। अगर वह ऐसा बताते हुए हर कीमत पर चिकित्सक उसको देखते। वह किसी प्राइवेट अस्पताल से लेकर आए थे। थोड़ी देर बाद ही मेडिकल में उसकी मौत हो गई।
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