अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
प्रदेश में चल रहे बिजली संकट का असर पश्चिमांचल तक पहुंच गया है। पीवीवीएनएल को जरूरत से 500 मेगावाट कम मिल रही बिजली के कारण कंपनी से जुड़े उपभोक्ताओं को इमरजेंसी कटौती का सामना करना पड़ रहा है। रात को कराई जा रही इमरजेंसी रोस्टिंग से पूरा शहर अंधेरे में डूब रहा है।
भीषण गर्मी ने प्रदेश में बिजली की मांग को 18 हजार मेगावाट तक पहुंचा दिया है। जबकि मांग के सापेक्ष प्रदेश को करीब 16 हजार मेगावाट बिजली की मिल पा रही है। विभागीय अधिकारी बिजली की कमी का कारण देश के कई हिस्सों में आई बाढ़ को बता रहे हैं। बाढ़ के चलते जनरेशन प्लांटों में विद्युत उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसकी गाज प्रदेश की चारों बिजली कंपनियों पर गिर रही है। प्रदेश में सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित करने वाली पीवीवीएनएल को भी बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी को मिलने वाली करीब पांच हजार मेगावाट बिजली घटकर करीब 4500 मेगावाट रह गई है। इससे आकस्मिक कटौती बढ़ती जा रही है।
लखनऊ कंट्रोल रूम हो रही इमरजेंसी रोस्टिंग
बिजली की कमी के चलते लखनऊ कंट्रोल रूम से इमरेजेंसी रोस्टिंग कराई जाने लगी है। बृहस्पतिवार को भी लखनऊ ने रात 10 बजे इमरजेंसी रोस्टिंग करा दी जो रात सवा 11 बजे तक चली। यही हाल दिन में भी रहा। सिस्टम पर लोड होने से फीडर वाइज कटौती चलती रही। 33 केवी से निकलने वाले जिस फीडर में भी ज्यादा लोड आ जाता है वहां की बिजली घंटे दो घंटे के लिए काट दी जाती है। पूछने पर इसे फाल्ट का नाम दिया जाता है। इसके चलते प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार शहरी और ग्रामीण क्षेत्र को बिजली नहीं मिल पा रही है।
20 हजार मेगावाट के कर चुके करार
बीते शनिवार को समीक्षा करने मेरठ पहुंचे यूपीपीसीएल के चेयरमैन आलोक कुमार ने बिजली कटौती के सवाल पर बताया था कि प्रदेश सरकार ने पूरे साल के लिए 20 हजार मेगावाट बिजली खरीद का करार बिजली कंपनियों और ग्रिड से कर रखा है। फिलहाल ग्रिड में तकनीकी खामी और बाढ़ के चलते नदियों में सिल्ट आने से हाइड्रो पावर जनरेशन प्रभावित हो रहा है। मांग और उपलब्धता में 1500 से दो हजार मेगावाट का अंतर है।
वर्जन
मांग और उपलब्धता में कमी के चलते कंपनी को मिल रही बिजली में कुछ कमी आई है। हालांकि जो भी बिजली मिल रही है उसे घरों तक पहुंचाया जा रहा है। जल्द ही व्यवस्था सामान्य हो जाएगी।
अभिषेक प्रकाश, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ
खास बातें
18 हजार मेगावाट के सापेक्ष प्रदेश को मिल पा रही है 16 हजार मेगावाट बिजली
सिंगल फेस कनेक्शन वाली कालोनियों और टावरों में कट रही सर्वाधिक बिजली
देश के कई हिस्सों में आई बाढ़ के कारण प्रभावित हो रहा बिजली का उत्पादन