बिना मुखबिर कैसे हो स्टिंग
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। स्वास्थ्य विभाग को भ्रूण हत्या रोकने के मकसद से किए जाने वाले स्टिंग ऑपरेशन के लिए मुखबिर नहीं मिल रहे हैं। नतीजतन, एक जुलाई से लागू हो चुकी शासन की ‘मुखबिर योजना’ मेरठ में परवान नहीं चढ़ पा रही है।
इस योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग को भ्रूण जांच और भ्रूण हत्या करने वालों की जानकारी जुटाने के लिए मुखबिरों की जरूरत है। इस तरह केलोगों को पकड़वाने के लिए किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन पर शासन दो लाख रुपये खर्च करेगा। इनमें भ्रूण जांच या गर्भपात कराने वाले सेंटर को ढूंढने वाले व्यक्ति को 60 हजार रुपये दिए जाएंगे। जो महिला सेंटर में जाएगी, उसे एक लाख रुपये और जो महिला के साथ सहयोगी बनकर जाएगा या जाएगी उसे 40 हजार रुपये दिए जाएंगे।
हरियाणा और राजस्थान की तर्ज पर शुरू की गई यह योजना एक जुलाई से पूरे प्रदेश में शुरू हो चुकी है। जो भी इसमें पकड़ा जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें दोष सिद्ध होने पर पांच साल कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। मेरठ में भी इसे अमली जामा पहनाने की कवायद की गई, मगर मुखबिर न मिलने के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में ही पड़ी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार का कहना है कि कांवड़ यात्रा के बाद मुखबिर योजना पर फिर से काम किया जाएगा। मुखबिरों की तलाश की जाएगी।
खास बात
स्टिंग ऑपरेशन के लिए स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिल रहे मुखबिर
भ्रूण हत्या रोकने के लिए एक जुलाई से शुरू की गई थी योजना