इसके अनुसार 100 किलो या इससे ज्यादा कूड़ा रोजाना पैदा करने वाले कामर्शियल संस्थानों, फैक्ट्रियों व कारखानों का कूड़ा अब नगर निगम नहीं उठाएगा। इस कूड़े को उन्हें स्वयं निस्तारित करना होगा। नगर निगम केवल आवासीय कूडे़ को उठाकर निस्तारण करेगा।
लखनऊ से लौटे नगर आयुक्त ने शुक्रवार को हाउस टैक्स अधिकारियों व स्वास्थ्य विभाग के इंस्पेक्टरों की बैठक लेकर मामले से अवगत कराया और दो दिन के अंदर कामर्शियल और आवासीय इलाकों से निकलने वाले कूड़े की विस्तृत जानकारी मांगी।
800 टन कूड़ा निकलता है शहर से
शहर से रोजाना करीब 800 टन कूड़ा निकलता है, जिसे नगर निगम ठिकाने लगाता है। बताया जा रहा है कि इस कूड़े में करीब 50 फीसदी हिस्सा कामर्शियल संस्थानों, कारखानों और फैक्ट्रियों आदि का होता है। शहर में कूड़ा निस्तारण प्लांट नहीं बनने से कई जगह कूड़े के पहाड़ खड़े हो गए हैं। लोगों का सांस लेना दूभर हो रहा है।
मिनी कंपोस्ट यूनिट लगानी होगी
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक 100 किलो से ज्यादा कूड़ा उत्सर्जित वाले विवाह मंडपों, कामर्शियल संस्थानों, फैक्ट्रियों और कारखानों आदि को अपने कूड़े का स्वयं निस्तारण करना होगा। इसके लिए उन्हें मिनी कंपोस्ट यूनिट लगानी होगी।
सर्वे होने के बाद नगर निगम ऐसे सभी प्रतिष्ठानों को नोटिस भेजकर निर्देशित करेगा। अभी तक ये सभी कामर्शियल संस्थान अपने कूड़े को ढलावघर पर फेंकते आए हैं या नगर निगम कर्मचारी उठाते रहे हैं। इनसे निकलने वाले कूड़े का निस्तारण उन्हीं के स्तर पर होने से न केवल राहत मिलेगी, बल्कि कंपोस्ट की जरूरत भी पूरी हो सकेगी।
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