सूबे में तीसरी सरकार है, लेकिन हस्तिनापुर भीकुंड में गंगा पुल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। बजट भी 22.68 करोड़ से बढ़कर 178.72 करोड़ पहुंच गया है। कभी धन का संकट, तो कभी गंगा में जलस्तर बढ़ने को पुल निर्माण में देरी का कारण बताया गया। हर सरकार ने अपने कार्यकाल में गंगापुल निर्माण कार्य पूरा कराने और मेरठ-बिजनौर के बीच की दूरी कम करने का राग अलापा। लेकिन निर्माण कार्य के साथ राजनीति भी हुई। योगी सरकार ने भी मार्च तक हर कीमत पर निर्माण पूरा करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अभी तक काम अधूरा ही है। फिलहाल गंगा में जल स्तर बढ़ने के कारण कार्य रोका गया है। गंगा पर एक किमी लंबा पुल और दोनों तरफ 11 किमी सड़क का निर्माण किया जाना शेष है। अब दिसंबर तक काम पूरा करने की बात कही जा रही है, लेकिन ये फरवरी 2020 तक पूरा होना संभव नहीं दिखाई दे रहा है।
उप्र में बसपा की सरकार ने 2008 में हस्तिनापुर भीकुंड गंगा पुल के माध्यम से मेरठ और बिजनौर की दूरी कम करने का निर्णय लिया था। सरकार ने सेतु निगम और पीडब्लूडी से गंगा पुल और पुल के दोनोें ओर सड़क बनाने पर आने वाले खर्च का बजट प्रस्ताव मांगा। शासन से धन स्वीकृत होने के बाद विभागों ने 2009-10 में पुल बनाने की कार्यवाही शुरू कर दी। सरकारें बदलती गईं और पुल निर्माण में लगे सरियों पर जंग लगता गया। 2012 में जब उप्र में अखिलेश यादव की सरकार बनी, तो पुल निर्माण रोक दिया गया। हालांकि बाद में जनता की मांग पर रिवाइज बजट जारी किया गया। काम भी हुआ, लेकिन जैसे ही योगी सरकार आई, तो पुल और सड़क निर्माण की रफ्तार फिर धीमी हो गई। बिजनौर से पूर्व सांसद कुंवर भारतेंद्र ने सरकार में गंगापुल निर्माण की बात उठायी, तो सरकार ने दोनों विभागों से रिवाइज बजट प्रस्ताव मांग लिया। अभी तक दोनों विभागों को रिवाइज बजट नहीं मिला है। अकेले सेतु निगम को रिवाइज बजट के रूप में अब तक 38 करोड़ 74 लाख में से 31 करोड़ 48 लाख मिले हैं। यानी सरकार से सात करोड़ 34 लाख रुपये नहीं मिले हैं, जिस कारण काम बंद हो गया है।
समय से होता निर्माण तो बन जाते ऐसे आठ पुल
10 साल में गंगापुल निर्माण की समय सीमा कई बार बदली। गंगा पुल और अप्रोच मार्ग की लागत भी 22.68 करोड़ से बढ़कर 178.72 करोड़ रुपये पहुंच गयी है। यानी अगर समय से यह पुल शुरू हो जाता, तो ऐसे आठ पुल बनाए जा सकते थे।
2008 में बसपा सरकार ने तैयार कराया बजट प्रस्ताव
स्वीकृत किया था 22 करोड़ 68 लाख रुपये का बजट
पीडब्लूडी को 5 करोड़ 62 लाख में बनानी थी सड़क
सेतु निगम को 17 करोड़ 06 लाख दिए गए पुल निर्माण को
2012 में बनी सपा सरकार, 2016 में रिवाइज हुआ बजट
पुल और सड़क निर्माण के लिए पास हुए 119.51 करोड़ रुपये
सेतु निगम को पुल निर्माण के लिए मिले 32 करोड़ 79 लाख रुपये
पीडब्लूडी को सड़क निर्माण के लिए मिले 86 करोड़ 72 लाख रुपये
जनवरी 2019 में योगी सरकार में रिवाइज बजट प्रस्ताव बनवाया
सेतु निगम ने 38 करोड़ 74 लाख का बजट प्रस्ताव भेजा
पीडब्लूडी ने सड़क निर्माण के लिए 139 करोड़ 99 लाख का भेजा बजट प्रस्ताव
ये बताए लागत बढ़ने के कारण
- प्रथम बजट प्रस्ताव में वन विभाग को दिये जाने वाले साढ़े तीन करोड़ शामिल नहीं किए गए थे, जो अब रिवाइज बजट में शामिल करने पड़े।
- निर्माण सामग्री पर महंगाई की पड़ती रही मार।
- जीएसटी का भी बोझ बता रहे हैं अधिकारी।
वर्जन
- गंगापुल का 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अब गंगा में पानी भी बढ़ गया है, जिसके कारण काम बंद करना पड़ा। उधर, शासन से पुल निर्माण के लिए रिवाइज बजट भी नहीं मिल पाया है। अगर समय से बजट मिल जाता है तो बरसात के बाद काम शुरू करके दिसंबर तक पुल निर्माण कार्य पूरा कर देंगे। रही बात बजट बढ़ने की, तो महंगाई के कारण बजट बढ़ा है।
- केवी सिंह, परियोजना प्रबंधक सेतु निगम
- पुल के दोनों ओर अप्रोच रोड पर मिट्टी का कार्य लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो गया है। पत्थर की कुटाई का काम शेष है। पुल निर्माण पूरा होने के बाद दो माह के भीतर काली सड़क बनाकर तैयार कर दी जाएगी। अभी कुल मिलाकर अप्रोच रोड का कार्य पूर्ण करने के लिए सरकार से 66 करोड़ लिए जाएंगे। फिलहाल हमने पांच करोड़ रुपये की मांग की है। अभी धन मिला नहीं है। धन मिलते ही मिट्टी आदि का भुगतान किया जाना है।
- प्रताप सिंह, अधिशासी अभियंता पीडब्लूडी