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10 लाख की मशीन से भगाए जाएंगे मच्छर  

Tue, 09 May 2017 02:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मच्छर जंजाल बने हुए हैं। पुरानी मशीनों से की जा रही फॉगिंग का उन पर कोई खास असर नहीं हो रहा है। यही वजह है कि हर साल मलेरिया के केस बढ़ते जा रहे हैं। इससे निबटने के लिए अब मलेरिया विभाग करीब 10 लाख रुपये कीमत की थर्मल फॉगिंग मशीन लाने की तैयारी कर रहा है। शासन से भी इसके लिए हरी झंडी मिल चुकी है।
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 थर्मल फॉगिंग मशीन से 50 मीटर तक के क्षेत्र में फॉगिंग होती है। यह पुरानी मशीनों से ज्यादा कारगर बताई जा रही है। अभी तक मलेरिया विभाग के पास पांच छोटी फॉगिंग मशीनें हैं। इनमें दो पल्स फॉगिंग और तीन मिनी फॉगिंग मशीनें हैं। पल्स फॉगिंग मशीनों से गलियों में फॉगिंग होती है, जबकि मिनी फॉगिंग मशीनों से मकानों या भवनों के भीतर। ये मशीनें 10 से 15 मीटर क्षेत्र तक ही फॉगिंग कर पाती हैं। इनसे फॉगिंग का ज्यादा असर नहीं हो रहा है। यहीं नहीं प्रभावित क्षेत्रों में एंटी लार्वा के छिड़काव और फॉगिंग के बाद भी मलेरिया के मामले सामने आ रहे हैं। इस साल अप्रैल तक मलेरिया के 12 केस सामने आ चुके हैं। ऐसे में मलेरिया विभाग इस बार मलेरिया और डेंगू को लेकर किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है।


मलेरिया के मामले
वर्ष          सैंपल लिए गए       पॉजिटिव केस
2014         41991                 85
2015         65928                194
2016         68220                211

कैसे होता है मलेरिया
मलेरिया मादा एनाफ्लीज मच्छर के काटने से फैलता है। एनाफ्लीज एक स्थान पर ठहरे हुए पानी में प्रजनन करता है। मलेरिया का संक्रमण काल जुलाई से अक्तूबर तक अधिक रहता है। मलेरिया के रोगी को तेज ठंड व कंपकंपी के साथ कुछ समय के अंतराल पर तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द रहता है। 
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