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डेढ़ करोड़ की योजना फेल, अफसरों का घोटाला पास  

Wed, 03 May 2017 10:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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माध्यमिक शिक्षा विभाग में उत्तर प्रदेश सरकार की एक योजना का नाम तो बदला। लेकिन वह घोटाले की भेंट चढ़ गई। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए लागू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना को फेल करने वाले अफसर गड़बड़झाले में पास हो गए। शासन की योजना को ऐसा पलीता लगाया कि एक साल में डेढ़ करोड़ रुपये में से अभी करीब 10 लाख रुपये का काम ही नजर आ रहा है। जबकि योजना का 40 लाख रुपया जहां लापरवाही के चलते वापस हो गया, तो बाकी एक करोड़ के हिसाब का कुछ पता नहीं है। 
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यह थी योजना 
राजकीय कालेजों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तत्कालीन सपा सरकार ने ‘क्लीन स्कूल, ग्रीन स्कूल’ नाम से योजना शुरू की थी। जिसका नाम अब भाजपा सरकार में ‘अटल उत्कृष्ट विद्यालय योजना’ हो गया। योजना में जिले के तीन राजकीय कालेजों का चयन हुआ था। जिसके तहत प्रत्येक कॉलेज को 50-50 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। जिसमें व्यय का मद भी शासन ने तय किया था। इसमें प्रत्येक कॉलेज को 20 लाख रुपये अनुरक्षण (मरम्मत आदि) मद में खर्च करने थे। जबकि 10 लाख रुपये फर्नीचर, 10 लाख रुपये सोलर लाइट और अन्य 10 लाख रुपये से स्मार्ट क्लास, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी, खेल के सामान आदि पर व्यय करने थे। 

हाल यह हुआ
पहले फेस में जीआईसी मेरठ के लिए 50 लाख रुपये सीधे जिला विद्यालय निरीक्षक मेरठ के खाते में आए। जबकि दूसरे फेस में दो स्कूलों जीआईसी हस्तिनापुर और जीजीआईसी किठौर के लिए पैसे ट्रेजरी में पहुंचे। जिला विद्यालय निरीक्षक ने अपने खाते में आए पैसों को लगभग व्यय कर दिया। इसके लिए उन्होंने अनुरक्षण कार्य के लिए शासन से चयनित संस्था पैक्फेड को 20 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया। जबकि फर्नीचर के लिए 10 लाख रुपये का लखनऊ की एक कंपनी, सोलर लाइट के लिए नेडा को करीब 9 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया। बाकी कुछ पैसा अभी जिला विद्यालय निरीक्षक के खाते में है। आठ माह होने को हैं। लेकिन अभी तक राजकीय इंटर कालेज मेरठ में आधा-अधूरा फर्नीचर आया है, तो करीब एक लाख रुपये की किताबें ही लाइब्रेरी के लिये आई हैं। बाकी का पता नहीं।
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दूसरे स्कूलों में सिर्फ किताबें 
राजकीय इंटर कालेज हस्तिनापुर और राजकीय कन्या इंटर कालेज किठौर के 10-10 लाख रुपये फर्नीचर और सोलर लाइट योजना के वापस हो गए। जबकि यहां भी 20-20 लाख रुपये मरम्मत मद में संबंधित एजेंसी को दे दिए गए। लेकिन अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। काम के नाम पर यहां भी सिर्फ लाइब्रेरी के लिए एक-एक लाख रुपये की किताबें ही आयी हैं। 

कैसे कर दिया पूरा भुगतान 
इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल ये भी उठता है कि किसी भी कार्यदायी संस्था को पूरा भुगतान करने का नियम नहीं है। जैसे-जैसे काम आगे बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे भुगतान की प्रक्रिया भी आगे बढ़ती रहती है। लेकिन यहां पर मरम्मत के साथ ही नेडा को सोलर लाइट के काम का पूरा भुगतान कर दिया गया। जबकि लाइट लगी ही नहीं।

कुछ आया कुछ बाकी 
हमारे स्कूल का पैसा डीआईओएस के लिए आया था। स्कूल में पहले एक लाख रुपये की किताबें आयी थी और उसके बाद अब कुछ दिन पहले फर्नीचर आया है। वह भी पूरा नहीं है। कुछ आना अभी बाकी है। इसके अलावा कोई काम नहीं हुआ है। -फतेह चंद, प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कालेज मेरठ 

सिर्फ किताबें मिलीं
मेरे स्कूल में सिर्फ किताबें आयी हैं। बाकी कोई काम नहीं हुआ है। -मुनीष पाल, प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज, हस्तिनापुर 

कहीं गड़बड़ नहीं
मरम्मत के रुपये दे दिए हैं, जल्द ही कार्यदायी संस्था काम शुरू कर देगी। वापस पैसा दोबारा मंगवाने की तैयारी की जा रही है। इसमें कहीं कोई गड़बड़ नहीं है। -श्रवण कुमार यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक 
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