मऊ। महिला जिला अस्पताल को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट (एनक्वास) मिल गया है। यह आजमगढ़ संभाग का पहला अस्पताल है जिसे यह मान्यता मिली है। पिछले महीने दिल्ली से आई तीन सदस्यीय एनक्वास टीम ने कई मूल्यांकन पर अस्पताल की जांच की थी। टीम द्वारा जारी रिजल्ट में अस्पताल ने 89 फीसदी अंक पाकर यह उपलब्धि हासिल की है।
सीएमएस डॉक्टर यूके सान्याल ने बताया कि अस्पताल को 89.07 प्रतिशत अंकों के साथ राष्ट्रीय मान्यता मिली है। मंडल में यह पहला अस्पताल है जो कि इस मानक तक पहुंचा है। शासन मार्गदर्शन में महिला अस्पताल की कमियों को दूर किया गया। वहीं हॉस्पिटल मैनेजर डॉक्टर मिथिलेश रस्तोगी ने बताया कि इसको लेकर राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के निर्देश पर तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 6 से 8 मार्च तक अस्पताल का निरीक्षण किया। टीम में मध्य प्रदेश के डॉक्टर आलोक सिंह, चंडीगढ़ से आई डॉक्टर अल्का गुप्ता, हरियाणा से आई डॉक्टर सुनीता द्वारा ओपीडी, फार्मेसी, पैथालॉजी, एसएनसीयू, मेटरनिटी वार्ड, रेडियोलॉजी, प्रशासनिक सहित अन्य विभागों का मूल्यांकन 250 बिंदुओं पर किया। इसमें सेवाएं, सुविधाएं, मशीनें, यंत्र, स्टाफ और यूनिफॉर्म जैसे पहलुओं को परखा गया। सभी विभागों को 70 प्रतिशत से अधिक अंक मिले।
बताया कि जिला अस्पताल के एनक्वास प्रमाणित होने पर अब हर बेड के हिसाब से दस हजार यानी 100 बेड पर 10 लाख जबकि मुस्कान (एसएनसीयू) के लिए तीन लाख रुपये प्रतिवर्ष 3 साल तक रोगी कल्याण समिति को मिलेंगे। इसके अलावा जो भी जरूरतें आवश्यक मशीन, उपकरण, स्टॉप सहित अन्य डिमांड भी पूरी होंगी। स्टाफ भी बढ़ाया जाएगा। अभी अस्पताल की स्थिति वर्तमान में जिला महिला अस्पताल में 19 डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनके अलावा 63 नर्से, 6 वार्ड बॉय, 6 तकनीशियन सहित कर्मियों की तैनाती है।
तीन स्तरों पर निर्धारित मानक पूरा करने पर मिलती है यह उपलब्धि
एन्क्वास सर्टिफिकेट के लिए चिकित्सालयों को राष्ट्रीय स्तर के मानकों को अपने केन्द्र पर स्थापित करना पड़ता है। एन्क्वास अवार्ड के लिए विभिन्न स्वास्थ्य चिकित्सालयों के लिए तीन स्तरों पर मानक निर्धारित हैं। कोई स्वास्थ्य केंद्र जब पहले स्तर के मानकों को कम से कम 70 प्रतिशत तक प्राप्त कर लेता है, तभी उसे दूसरे स्तर पर जांचा जाता है।