डा.नम्रता श्रीवास्तव।महिला दिवस की खबर में फोटो
- फोटो : MAU
मऊ। देश की आधी आबादी आज देश के विकास से लेकर हर क्षेत्र में अपना सहयोग कर देश की विकास की गाथा लिख रही है। आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अमर उजाला जिले की ऐसी ही कुछ सशक्त महिलाओं से परिचय करा रहा है, जिन्होंने संघर्ष, जीवटता तथा अपनी योग्यता से अपने को एक मुकाम पर पहुंचाया। ऐसी ही जिला अस्पताल परिसर स्थित होमियोपैथ में महिला चिकित्सा अधिकारी हैं डाक्टर नम्रता श्रीवास्तव। जिन्होंने एलोपैथ विधा के बढ़ते प्रभाव के बीच होमियोपैथ को नया मुकाम दिया। कानपुर निवासी दिनेश कुमार श्रीवास्तव की तीन बेटियों में सबसे बड़ी डॉ. नम्रता श्रीवास्तव ने बीएचएमएस कर होमियोपैथिक डाक्टर बनीं। एमबीबीएस का सपना देेखने वाली डॉ. नम्रता सीपीएमटी क्वालीफाई करने के बाद काउंसिलिंग कराने पहुंची तो उन्हें बीएचएमएस करने का विकल्प मिला। उन्हें राजकीय होमियोपैथिक मेडिकल कालेज गाजीपुर मिला। 2009 में लोक सेवा आयोग की वैकेंसी के लिए उन्होंने आवेदन किया। वहां भी उनका चयन हो गया। इसके बाद 10 दिसंबर 2010 को उनकी पोस्टिंग मऊ जिला अस्पताल में महिला होमियोपैथिक चिकित्सा अधिकारी के रूप में हुई। तबसे अब तक वह निरंतर कार्यरत हैं। उनके पति डा. अरविंद श्रीवास्तव जिले के ही कोपागंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर वरिष्ठ होमियोपैथिक चिकित्सा अधिकारी के रूप में तैनात हैं। डॉ. नम्रता श्रीवास्तव नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर होमियोपैथ विधा का प्रचार-प्रसार कर लोगों को जागरूक कर रही हैं। वर्तमान में एक साथ लाखों-करोड़ों लोगों से जुड़ने का प्लेटफार्म बन चुकी सोशल साइटों को उन्होंने जागरुकता फैलाने का माध्यम बनाया। वह फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब आदि माध्यमों पर लाइव आकर वह विभिन्न रोगों के घरेलू उपचार व स्वस्थ्य रहने के उपायों पर अपने टिप्स देती रहती हैं। संक्रमण काल में डॉ. नम्रता श्रीवास्तव ने सोशल साइट्स प्लेटफार्म के जरिए लोगों को बचाव के प्रति जागरूक किया। 2016 में यूपी सरकार द्वारा अमर उजाला फाउंडेशन के सौजन्य से सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु नारी शक्ति सम्मान दिया गया। इसके अलावा बेस्ट डाक्टर अवार्ड, कोरोना योद्धा सम्मान प्रदान किया जा चुका है। मिशन शक्ति के तहत मऊ के तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा तीन बार सम्मानित हो चुकी हैं।