नगर के घास बाजार में करवाचौथ पर पूजन अर्चन के बाद चलनी से अपने पति का दीदार करतीं व्रती महिलाएं।
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मऊ। पति की लंबी उम्र की कामना को लेकर प्रतिवर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को परंपरागत रूप से मनाया जाने वाला करवाचौथ का पर्व बृहस्पतिवार को नगर सहित जिले में काफी उत्साह के साथ मनाया गया। महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखा। सज-धज कर चांदनी रात में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन किया। महिलाओं ने परंपरागत रूप से जलते दीपों की थालियां सजा कर चंद्र दर्शन किया। इसके अलावा उन्होंने चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत का पारण किया। करवाचौथ का व्रत व्रत सती सावित्री के समय से शुरू हुआ था। जिस समय यमराज ने सत्यवान के प्राण हर लिए तो उस समय सत्यवान और सावित्री मिट्टी के पात्र से पानी पीने की तैयारी में थे। उस दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की चौथ थी। लेकिन पानी ग्रहण करने से पहले ही यमराज सत्यवान के प्राण हर कर ले गए। तब सावित्री भी उनके पीछे पीछे गई और यमराज से अपने पति को बचा कर ले आई। उसके बाद ही सावित्री ने मिट्टी के पात्र से जल ग्रहण किया था। इसी मान्यता के तहत नगर के सहादतपुरा, मुंशीपुरा, ब्रह्मस्थान, चांदमारी इमिलिया, ब्राह्मणटोला सहित जिले के मधुबन, घोसी, मुहम्मदाबाद गोहना सहित विभिन्न ग्रामीण इलाकों में करवाचौथ का पर्व श्रद्धा से मनाया गया।बृहस्पतिवार को पर्व को लेकर व्रती महिलाओं में काफी उत्साह देखा गया। इस दौरान सुबह से ही महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए निराजल व्रत रखा और दिन में करवाचौथ से जुड़ी कहानियां मंदिरों तथा एक दूसरे के घरों में जाकर सुनीं। इस दौरान सभी घरों में महिलाओं ने अलग-अलग तरह के व्यंजन भी बनाए। शहर क्षेत्र के पावर हाऊस मंदिर, मां शीतला मंदिर, आजमगढ़ मोड़ स्थित दुर्गा मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में करवाचौथ से संबंधित कथा का भी आयोजन किया गया था। शाम को आसमान में जैसे ही चांद का दीदार हुआ लोगों के चेहरे खिल गए। सुहागिनों ने अपने जीवन साथी के साथ चांद का दीदार किया और दिन भर की उम्मीदों को मूर्त रूप दे दिया। चांद को अर्घ्य दिया और सजना ने अपने हाथ से सजनी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाया। इस दौरान सभी छतों पर महिलाएं एक साथ दिखाई दीं। उधर पर्व के मद्देनजर लोगों ने बाजारों में जमकर खरीदारी की।इसके चलते जाम की स्थिति बनी रही। खरीदारी करने पहुंचे लोगों को खासी दिक्कत हुई।