शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम प्रवीण मिश्र और एसपी कमलेश बहादुर ने लोगों की फरियाद सुनी। चारों तहसीलों में 355 प्रार्थनापत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 33 मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया।
मधुबन तहसील में सीआरओ दिनेश की अध्यक्षता में सुनवाई के दौरान मित्तनपुर निवासी मुटुरी देवी ने प्रार्थनापत्र देकर बताया कि उन्होंने वर्ष 2013 में गांव में भूमि खरीदी है। तब से वह दाखिल-खारिज के लिए तहसील मुख्यालय का चक्कर लगा रही हैं। इस दौरान तहसील के दो कर्मचारियों ने उनसे इस कार्य के लिए 10 हजार रुपये की मांग की।
उसने उन्हें 5000 रुपये दे दिए, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हुआ। आरोप है कि शेष 5000 रुपये नहीं देने पर फाइल गायब करने की धमकी दी जा रही थी। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए सीआरओ ने दोनों कर्मचारियों को पुलिस के हवाले कर दिया।
तहसील बार एसोसिएशन मधुबन के मंत्री अधिवक्ता अविनाश मल्ल ने अन्य अधिवक्ताओं के सहयोग से पीड़िता का पूरा पैसा वापस कराया। मधुबन तहसील में 65 प्रार्थनापत्र प्राप्त हुए, जिनमें अधिकांश मामले भूमि विवाद से संबंधित थे। तीन मामलों में तत्काल टीम रवाना की गई और 15 मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया।
उधर, मुहम्मदाबाद गोहना तहसील में 140 प्रार्थनापत्र प्राप्त हुए। इनमें सात मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया, जबकि छह मामलों के लिए टीम गठित कर भेजी गई। पुलिस और राजस्व से संबंधित 85 मामले थे। अधिकांश शिकायतें पैमाइश, अवैध कब्जा और चक मार्ग से संबंधित थीं।
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौके पर जाकर शिकायतों का निस्तारण करने से ही प्रभावी समाधान संभव है।
तहसील में प्रार्थनापत्र लेकर आए कुछ फरियादियों ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। काजीपुर बस्ती निवासी चंद्रमी देवी ने बताया कि उनका नाम राशन कार्ड से काट दिया गया है। इसके लिए वह चार बार प्रार्थनापत्र दे चुकी हैं।
रानीपुर ब्लॉक के काझा निवासी विधि चंद ने बताया कि उनके मकान के पास गाटा संख्या 1566 की पैमाइश के लिए आवेदन दिया गया, लेकिन संपूर्ण समाधान दिवस पर आदेश के बाद भी अभी तक पैमाइश नहीं की गई।
वलीदपुर के गणपत, अजय आदि ने बताया कि उनके घरों से निकलने वाले पानी की निकासी के लिए नाली नहीं है। पानी आसपास के मकानों के पास ही जमा हो जाता है, जिससे समस्या हो रही है। इस संबंध में कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
रानीपुर ब्लॉक के धर्मसीपुर गांव निवासी रंजना आर्य ने बताया कि चक के सीमांकन के लिए कई बार प्रार्थनापत्र दिया गया, लेकिन संबंधित लेखपाल ने पैमाइश नहीं की। कई बार बिना जानकारी के पैमाइश की रिपोर्ट भी लगा दी गई।
तियारा गांव निवासी शिवकुमार चौहान ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन पर विपक्षी जबरन कब्जा कर रहे हैं। पुलिस और राजस्व अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
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सदर तहसील में छह मामलों का मौके पर समाधान
सदर तहसील में 73 प्रार्थनापत्र प्राप्त हुए, जिनमें से छह का मौके पर निस्तारण किया गया, जबकि चार मामलों के लिए टीम गठित कर भेजी गई। इनमें राजस्व के 38, विकास के 11, पुलिस के 9 और अन्य 15 मामले शामिल थे।
घोसी तहसील में मुख्य विकास अधिकारी विवेक कुमार श्रीवास्तव ने सुनवाई की। इस दौरान 77 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से पांच का मौके पर निस्तारण किया गया। सर्वाधिक 53 शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित थीं। इसके अलावा पुलिस विभाग के 12, ब्लॉक के 6, नगर पंचायत के 2, विद्युत विभाग के 3 तथा अन्य विभागों के 3 मामले दर्ज किए गए।