मऊ। आपराधिक मामलों को छिपाकर चरित्र प्रमाण पत्र के लिए झूठा शपथ पत्र देने के मामले में जिले में पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तत्कालीन जिलाधिकारी और वर्तमान में राजस्व परिषद के सचिव पी गुरु प्रसाद का बयान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता चौधरी ने दर्ज किया।
बयान पूरा होने के बाद आरोपी की ओर से जीरह नहीं हो सकी। सीजेएम ने मामले में जीरह के लिए 23 अप्रैल की तिथि नियत किया। राजस्व परिषद के सचिव के कोर्ट में साक्ष्य के लिए उपस्थित न होने पर उनके विरुद्ध न्यायालय से गैर जमानतीय वारंट जारी हुआ था। वह मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित न होने पर सीजेएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनका वारंट रिकाल कर बयान दर्ज किया। मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार तत्कालीन जिलाधिकारी वर्तमान में राजस्व परिषद के सचिव पी गुरु प्रसाद के आदेश पर शहर कोतवाली में धारा 419,420,467, 468 भादवि के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कैथवली गांव निवासी हरेंद्र सिंह को नामजद किया था।
आरोप है कि 28 मई 2017 को हरेंद्र सिंह ने चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। अपने आवेदन पत्र के साथ उन्होंने अपने विरुद्ध चल रहे आपराधिक मुकदमा को छुपा कर गलत शपथ पत्र दिया था। जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया कि उन्होंने तथ्यों को छिपाकर गलत शपथ पत्र देकर चरित्र प्रमाण पत्र प्राप्त करने का प्रयास किया था।