इस वित्तीय वर्ष में 176 गांव को शौचालय युक्त करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन अभी तक सिर्फ छह गांव ही शौचालय युुक्त (ओडियस) हो पाए हैं। अक्तूबर माह में ही 42 गांव को शौचालय युुक्त करना है। जिले में स्वच्छता मिशन योजना धरातल पर नहीं उतर पा रही है। इसके बाद भी विभाग सचेत नहीं हो रहा है। स्वच्छता अभियान के तहत वर्ष 2015-16 में 34512 के सापेक्ष जहां 28600 शौचालयों का निर्माण ही किया जा सका वहीं 2016-17 में 36068 के सापेक्ष मात्र 5318 शौचालय ही बन पाए हैं। इसके विपरीत विभाग का दावा है कि वह इस माह 42 गांव को ओडियस में शामिल करेगा।
जिला पंचायतराज विभाग से मिली जानकारी पर गौर करें तो स्वच्छता मिशन के तहत जिले में 2019 तक एक लाख 92 हजार शौचालयों का निर्माण होना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए विभाग हर वित्तीय वर्ष में एक लक्ष्य निर्धारित कर शौचालय बनवा रहा है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में यह लक्ष्य 36068 रखा गया है। इसके लिए 43 करोड़ 28 लाख 16 हजार रुपये का खर्च का ब्यौरा भी तैयार है लेकिन अभी तक छह करोड़ 55 लाख 80 हजार खर्च करने के बाद विभाग मात्र 5318 शौचालयों का निर्माण करा सका है।
गांवों को स्वच्छ रखने के लिए केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छता मिशन योजना के तहत शौचालयों का निर्माण किया जाना है। इसके लिए प्रति शौचालय के लिए 12 हजार रुपया अनुदान राशि दी जाती है। विभागीय आंकड़ों से अगर मिलान करें तो हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। फतहपुर मंडाव ब्लाक क्षेत्र के सुल्तानपुर बारहगांवा में 106, छपराभंगी में 53, पहाड़ीपुर में 19, उफरौली में 50, मारुफपुर में 11, बहादुरपुर में 27, कटघराशंकर में 12, महुवी 19 शौचालयों का निर्माण कार्य कागज में दिखा दिया गया है, लेकिन धरातल पर नहीं बना है। यही हाल अतरौली, दुबारी गांव सहित तमाम गांव हैं। यह तो एक बानगी है।
इस बाबत जिला पंचायतराज अधिकारी शेषदेव पांडेय का कहना है कि शौचालयों के बनने का मामला संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।