घाघरा का जलस्तर वैसे तो घटता जा रहा है। पर मुक्तिधाम तथा भारत माता मंदिर की दीवारों पर पानी का दबाव बना हुआ है। भारत माता मंदिर को कटान से बचाव के लिए लगाए गए कई बोल्डरों के मंगलवार को खिसक गए। बोल्डरों के खिसकने से कसबा सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की नींद उड़ गई है। नदी के तेवर से दोहरीघाट कस्बा सहित पुराने धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
नदी के घटते जलस्तर से सिंचाई विभाग के अधिकारी राहत की सांस ले रहे हैं। पर दोहरीघाट कस्बा सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही हैं। नदी के जलस्तर में घटाव दर्ज किया जा रहा है। लेकिन मुक्तिधाम तथा भारतमाता मंदिर की दीवारों तक लहरें पहुंच रही हैं। मंदिर को कटान से बचाने के लिए लगाए गए कई बोल्डर दूसरे दिन भी खिसक गया है। कस्बेवासियों का कहना है कि यदि भारत माता मंदिर तथा मुक्तिधाम नदी में विलीन हुआ तो कस्बे का ही अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उनका यह भी कहना था कि जब-जब नदी घटती बढ़ती है तब-तब खतरा बढ़ जाता है।
मंगलवार को 24 घंटे में घाघरा के जलस्तर में पांच सेमी का घटाव दर्ज किया गया। घाघरा के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो मंगलवार को नदी का जलस्तर 69.44 मीटर रहा। जबकि सोमवार को 69.44 मीटर रहा।