खेतों में धान की फसल फूट रही है। ऐसे में फसलों को सिंचाई की सख्त जरूरत है। लेकिन माइनरों से टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा। जिले में करोड़ों की लागत से बनी 391 किलोमीटर की तीन नहरें सिंचाई में सक्षम नहीं हो पा रही। इन नहरों की 70 माइनरे हैं। कई माइनरों की साफ सफाई न होने से इनमें खर पतवार की भरमार हो गई है। सिंचाई में आ रही दिक्कतों को देखते हुए किसानों की ओर से जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी उठने लगी है।
जिले में 92 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गई है। इस समय लेट बेराइटी के धान की फसल फूट रही है। ऐसे में खेतों में सिंचाई की सख्त जरूरत है। बारिश भी बहुत कम हुई है। किसानों के अनुुसार रानीपुर, परदहा, मुहम्मदाबादगोहना, रतनपुरा सहित कई ब्लाकों में नलकूप ने पानी देना बंद कर दिया है।
मधुबन तहसील क्षेत्र की माइनरें सूखी पड़ी हैं। सिंचाई की दयनीय स्थिति होने के चलते किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कहने को तो जिले में दोहरीघाट पंप कैनाल, शारदा सहायक खंड 32 तथा खुरहट पंप कैनाल की 70 माइनरों का जाल बिछा हुआ है। शारदा सहायक खंड 32 बैसाखी के सहारे है। किसानों की जरूरत के मुताबिक नहर तथा माइनरों में पानी टेल तक नहीं पहुंच रहा है।
अधिकारियों की मानें तो बारिश कम होने से पानी की जबरदस्त मांग है। ऐसे में दबंग किसान मुख्य नहर तथा प्रमुख माइनरों के कुलाबों को खुला छोड़ दे रहे हैं। कहीं-कहीं माइनरों को बांध दे रहे हैं। जिससे पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। जबकि संज्ञान में होने के बाद भी विभागीय अधिकारी लापरवाह बने हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि फूट रही धान की फसल में दाना बनने तक खेत में नमी आवश्यक है। सिंचाई न होने की स्थिति में उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत कमी आ सकती है।
किसान नेता देवप्रकाश राय, राकेश सिंह, शिवाकांत सिंह, महेंद्र सिंह का कहना है कि जून से लेकर अब तक 35 प्रतिशत भी बारिश नहीं हुई है। इसके कारण धान का उत्पादन 60 प्रतिशत कम हो रहा है। ऐसे में किसानों ने जनपद को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठाई है। चेताया है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो किसान आंदोलन को बाध्य होंगे।
दोहरीघाट पंप कैनाल पूरी क्षमता से चल रही है। पानी की डिमांड ज्यादा है। किसान मुख्य नहर तथा माइनरों के कुलाबा खुला छोड़ दे रहे हैं। इसके चलते पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। वीरेंद्र पासवान, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग