बीते माह से तमसा को निर्मल बनाने के लिए लोगों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बारिश से तमसा का जलस्तर बढ़ा तो नदी भी कल-कल की ध्वनि के साथ प्रवाहमय हुई। गंदगी की सफाई और नदी के बीच से अवरोध को हटाए जाने से तमसा के किनारों का फैलाव भी हुआ, जो बुधवार को साफ दिखा। हनुमानघाट और गायघाट पर लोगों के प्रयास का सुफल है। लोगों और प्रशासनिक अफसरों ने एक दूसरे को बाधाइयां दी।
बताते दें कि 28 मई से अमर उजाला ने तमसा का दर्द कालम में तमसा के मुद्दे का जोरदार ढंग से उठाया। इसका परिणाम रहा कि जिला प्रशासन ने इसे संज्ञान में लिया। तमसा का निरीक्षण करने के बाद उसे स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने निर्मल तमसा अभियान चलाया। 12जून को जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक की, जिसमें सभी वर्ग के लोगों ने हिस्सा लिया।
इसके बाद 14 जून से तमसा को निर्मल बनाने के लिए निर्मल तमसा अभियान शुरू हुआ। जो लगातार जारी रहा। अभियान के दसवें दिन ही तमसा के पानी में व्याप्त गंदगी को साफ कर लिया गया था। लेकिन हनुमानघाट और गायघाट पर पानी के बहाव के लिए बने अवरोध की सफाई सभी के लिए चुनौती बन गई थी।
जिलाधिकारी ने यहां तक कह दिया कि इस मलबे के हटे बिना अभियान का समापन नहीं होगा। मलवा हटाने के लिए लगाई गई युक्ति के क्रम में लखनऊ से ड्रिल पोकलैन मंगाई गई। यह पोकलैन मंगलवार की सुबह लखनऊ से जिला मुख्यालय स्थित गायघाट पर पहुंची। पोकलैन ने 24 घंटे के अंदर नदी की धारा में गिरे पुल के पांच मलवे को तोड़कर हटा दिया। बुधवार की सुबह साढ़े नौ बजे तक पूरा मलवा साफ हो गया, इसके बाद नदी अविरल बहने लगी।