जिले में किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए स्थापित साधन सहकारी समितियों की हालत खराब है। 99 समितियों में से 40 के भवन जर्जर हो चुके हैं।
ऐसे में बारिश में इन भवनों में 3.50 लाख क्विंटल यूरिया, डीएपी, एनपीके खाद को तिरपाल के सहारे बचाना विभाग के लिए चुनौती होगा। शनिवार को टीम ने रतनपुरा, परदहां, रानीपुर, बड़रांव और फतहपुर मंडाव ब्लॉक में पहुंचकर सहकारी समितियों के भवनों की पड़ताल की।
इस दौरान सहकारी समिति अमिला कोट, मादी दुल्ह, बहरामपुर, बड़रांव, थलईपुर, पहदेवाजीत, कोपागंज, परदहां ब्लॉक के सरवां, ढाढ़ाचवर, दुबारी, मझवारा, लुदुही, लोहा टिकर, पलिया सहित 40 सहकारी समितियों के भवन जर्जर हालत में मिले।
पहदेवाजीत सहकारी समिति के किसानों की खाद रतनपुरा स्थित समिति से वितरित की जाती है। बाहर से रंग-रोगन तो कर दिया गया था, लेकिन छत फटने से सरिया दिख रही थी और दीवारों में दरार पड़ गई थी।
ग्रामीणों से बात करने पर पता चला कि बारिश के दिनों में खाद को ढकने के लिए तिरपाल का सहारा लेना पड़ता है। सीलन के कारण बोरियों में पैक खाद खराब हो जाती है। छत से प्लास्टर छूटकर गिरने के कारण सचिव और कर्मचारी भी बैठने से कतराते हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार इन दिनों जिले में 2 लाख 11 हजार 660 क्विंटल यूरिया, 79 हजार 610 क्विंटल डीएपी, 50 हजार 630 क्विंटल एनपीके और 8630 क्विंटल एमओपी उपलब्ध है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इस साल उन्होंने पांच जर्जर भवनों को चिह्नित कर मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा है। 99 में से इन पांच के अलावा आठ जगहों पर खाद नहीं भेजी गई है। अभी 12 हजार क्विंटल डीएपी की डिमांड भेजी गई है, ताकि धान की रोपाई तक किसानों को कमी न हो।
कोट-
पांच जर्जर समितियों के भवन को चिन्हित कर मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मिलते ही मरम्मत कराई जाएगी। बीते साल भी पांच की मरम्मत कराई गई थी। इनके अलावा भी कुछ भवन जर्जर हैं, जिन्हें अगले साल के प्रस्ताव में शामिल किया जाएगा। बताया कि जिले में यूरिया, डीएपी, एनपीके पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। -विजय प्रताप सिंह, अपर जिला सहकारी अधिकारी, मऊ
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किसानों की प्रतिक्रिया
अमिला कोट स्थित सहकारी समिति का भवन जर्जर हालत में है। बारिश होने पर छत से पानी टपकता है। यही कारण है कि धान के सीजन में यहां खाद मिलना मुश्किल हो जाता है। वहां से पांच किमी दूर गोठा जाकर खाद लाना पड़ता है। -सुनील कुमार, किसान
छत से पानी टपकने के कारण सचिव धान के सीजन में खाद की डिमांड नहीं भेजते हैं, जिसके चलते क्षेत्र के किसानों को निजी दुकानों से खाद लेना पड़ता है। -अनुराग राय
करीब 40 साल पहले बने सहकारी समितियों के भवन मरम्मत की हालत में पहुंच गए हैं, लेकिन सहकारिता विभाग की हालत यह है कि प्रस्ताव भेजने के बाद भी विभागीय उच्चाधिकारी बजट देने से कतराते हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। -देवेंद्र प्रसाद मिश्रा, किसान नेता
पहदेवाजीत सहकारी समिति से संबद्ध किसान इतनी दूरी तय करके रतनपुरा सहकारी समिति पर खाद और बीज लेने जाते हैं। समिति की मरम्मत के लिए कई बार आवाज उठाई गई थी, लेकिन सुनवाई नहीं होती है। -नेसार अहमद, किसान नेता