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Mau News: जलकुंभी से 80 महिलाओं को मिलेगा रोजगार

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घोसी/मऊ। अब शीघ्र ही बड़रांव ब्लाॅक क्षेत्र के इलाकों में पोखरों और तालाबों में वर्षों से जमी जलकुंभी की घास से दोना, पत्तल, लैपटाॅप बैग, पेन, होल्डर सहित 50 से अधिक प्रकार की सजावटी व रोजमर्रा के काम आने वाली चीजें बनाई जाएंगी। बड़रांव के बीडीओ ने इसकी पहल की है। एनआरएलएम की टीम की मदद से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 80 महिलाओं को इसका प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रोजेक्ट प्रदेश के मऊ जिले के बड़रांव ब्लॉक क्षेत्र में शुरू किया गया है।
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घोसी तहसील क्षेत्र के पकड़ी ताल, घोसी तहसील के प्राचीन सीता कुंड पोखरा, ताल रतोय सहित नदियों, तालों, तालाबाें में जलकुंभी है। इससे महिलाएं उत्पाद बनाएंगी। इससे उन्हें शून्य लागत में रोजगार मिलेगा। उत्पादों की बिक्री कर महिलाएं आत्मनिर्भर भी बनेंगी। महिलाएं दोना, पत्तल, पेन होल्डर, लैप टाप बैग, कैरी बैग, फाइल सहित 50 से अधिक प्रकार की सजावटी व रोजमर्रा के काम आने वाली चीजें बनाएंगी। उत्पादों की मार्केटिंग राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और उद्योग केंद्र की तरफ से होगी।
बीडीओ अरुण कुमार वर्मा, एनआरएलएम के ब्लॉक मिशन मैनेजर पंकज पांडेय और अनुस्वार फाउंडर नागमणि राय ने बताया कि जलकुंभी से उत्पाद बनाने के कार्य में जलजीविका एवं अनुस्वार संस्था समूह की महिलाएं आगे आई हैं। स्वयंसेवी संस्था से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। 10 हजार की मशीनों का इस्तेमाल कर उत्पाद बनाया जाएगा। जिला मिशन मैनेजर हिमांशु मिश्रा ने बताया कि 80 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रोजेक्ट प्रदेश के मऊ जिले में शुरू किया गया है। यह महिला स्वावलंबन और आय संवर्धन की दिशा में कारगर सिद्ध होगा। आजीविका के सीईओ नीलकंठ मिश्र ने बताया कि जलकुंभी को अनुपयोगी, तालाबों-नदियों का दुश्मन माना जाता है। जलकुंभी घास से मच्छर पनपते हैं। जलकुंभी घास का प्रसंस्करण कर दोना, पत्तल, सजावटी सामान, गुलदस्ते, कागज, बोर्ड आदि आसानी से तैयार कर बाजार में बेचे जा सकते हैं। तकनीक और रणनीति के साथ आगे बढ़ा जाए तो जलकुंभी से बेराेजगारी दूर की जा सकती है।
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