मऊ। स्वामी विवेकानंद जयंती पर शनिवार को नगर के पुरानी तहसील स्थित आरएस पैलेस के सभागार वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रुप में प्रज्ञा प्रभा संगठन के संयुक्त क्षेत्र उत्तर प्रदेश के संयोजक रामाशीष सिंह उपस्थित रहें। उन्होंने विवेकानंद के जीवन पर प्रकाश डाला।
बोले स्वामी विवेकानंद सात समंदर पार अमेरिका के शिकागों में आयोजित विश्व धर्म संसद में भाग लेने गए। वह जब स्वामी जी बोलना शुरू किए तो दुनिया उन्हे सुनती ही नहीं अपलक एकटक देखती रही । बोले स्वामी जी के बचपन के साथी का नाम कमल रेड्डी था। जब वे किशोरवस्था में पहुंचे तो वो ब्राह्मो समाज के संपर्क में आए और अंतत: श्री रामकृष्ण से उनकी मुलाकात हुई। श्री रामकृष्ण की वजह से उनकी सोच में बदलाव आया, और उनकी मृत्यु के बाद नरेंद्रनाथ ने अपना घर छोड़ दिया। साथ ही उन्होंने अपना नाम बदलकर स्वामी विवेकानंद कर लिया। बाद में उन्होंने त्रिवेंद्रम पहुंचने पूरे भारत का दौरा किया। इसका परिणाम रहा कि वो धर्म संसद में शामिल होने के लिए शिकागों पहुंचे।
शिकागो में उनके द्वारा दिए गए भाषण से पूरी दुनिया भर में हिंदू धर्म के लिए प्रशंसा बटोरी। विशिष्ट अतिथि अंर्तराष्ट्रीय गीता प्रवचन कर्ता अमेरिका स्थित इंटरनेशनल गीता गुरुकुल फाउंडेशन मिशिगन के संस्थापक अध्यक्ष योगी आनंद जी ने स्वामी विवेकानंद के विषय में विस्तार से बताया। बोले स्वामी जी का चरित्र हमें जीवन जीने की प्रेरणा देता है। काल के भाल पर कुंकुम उकेरने वाले वे सिद्धपुरुष थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आयोजन समिति के संरक्षक चंद्रशेखर अग्रवाल उर्फ चन्दू बाबू ने किया। कार्यक्रम को आनंद कुमार, देवेंद्र मोहन सिंह, मिथिलेश कुमार सिंह के साथ अमृत पब्लिक स्कूल के छात्र अभिनव यादव ने संबोधित किया। राम स्वरूप भारती इंटर कालेज की छात्राओं ने राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम के समापन की घोषणा की। संचालन मानसी अग्रवाल ने किया। इस अवसर डा. गंगा सागर सिंह, डा. सर्वेश पांडेय, डॉ. सीपी राय, उत्तम सिंह, सुनील कुमार दुबे सोनू , ज्ञान प्रकाश सिंह, कमलेश सिंह, राजा आनंद ज्योति सिंह, तुषारकांत सिंह, पंकज तिवारी, बाबू लाल अग्रवाल आदि मौजूद रहे।