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Mau News: हैंडपंपों की मरम्मत को लेकर गंभीर नहीं दिख रही ग्राम पंचायतें

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संवाद न्यूज एजेंसी
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मऊ। जिले में खराब पड़े हैंडपंपो की मरम्मत नहीं कराई जा सकी है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी न तो ब्लाक मुख्यालय और न ही जिलास्तरीय अधिकारी गंभीर हैं।
ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परदहा ब्लॉक के 34 गांवों में 1874 हैंडपंप, रानीपुर ब्लॉक के 85 गांवों में 5300 हैंडपंप, रतनपुरा ब्लॉक के 77 गांवों में 2891, घोसी ब्लॉक के 70 गांवो में 2375 हैंडपंप, वहीं फतेहपुर मंडाव ब्लॉक के 78 गांवों में 2547 हैंडपंप, दोहरीघाट ब्लॉक के 74 गांवों में 4243 इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए गए हैं। पूर्व में इसके रखरखाव की जिम्मेदारी जल निगम की थी, लेकिन अब व्यवस्था में परिवर्तन कर हैंडपंपों की मरम्मत का दायित्व ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया है। लेकिन ग्राम पंचायतें हैंडपंपों की मरम्मत को लेकर गंभीर नहीं हैं। सही मॉनिटरिंग के अभाव में अधिकांश हैंडपंप या तो खराब हैं या निजी कब्जे में हैं।
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विभागीय दावों के अनुसार ज्यादातर हैंडपंपों की मरम्मत कराई जा रही है। जबकि हकीकत में हर गांव में हैंडपंप खराब हालत में हैं। बहुत से हैंडपंप री-बोर कराने की स्थिति में हैं। उमस भरी गर्मी में ग्रामीणों और राहगीरों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। प्रदूषित पानी के सेवन से लेाग उल्टी, डायरिया, पेटदर्द सहित विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। ग्रामीणोें का कहना है कि ग्राम प्रधान, ब्लाॅकस्तरीय अधिकारियों तथा जिलास्तरीय अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन ठीक नहीं कराए जा रहे।
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कोट
हैंडपंपो की मरम्मत और रिबोर की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। सूचना मिलते ही मरम्मत कराया जाता है। सबमर्सिबल लगाकर हैंडपंपों को कब्जा करने की शिकायत पर उसे तत्काल कब्जे से मुक्त कराया जाएगा।
राजेंद्र प्रसाद
डीपीआरओ
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