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जिला अस्पताल में आए वेंटीलेटर बने शोपीस

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जिला अस्पताल स्थित पीआईसीयू में लगा वेंटिलेटर भर्ती मरीज।संवाद - फोटो : MAU
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जिला अस्पताल में लाखों के वेंटीलेटर शोपीस बने हैं। जबकि रोजाना दो से तीन ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं जिन्हें वेंटीलेटर की जरूरत है। लेकिन आईसीयू और स्टाफ न होने पर इनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को डॉक्टर प्राथमिक उपचार करने के बाद रेफर कर दे रहे हैं। करीब 25 लाख की आबादी को नि:शुल्क उपचार के लिए 100 बेड का जिला अस्पताल इन दिनों खुद बीमार है। यहां कोरोना संक्रमण की पहली लहर में करीब 24 लाख रुपये की लागत से तीन वेंटीलेटर खरीदे गए थे। इसमें दो पोर्टेबुल थे। जब से यह वेंटीलेटर आए तब से यह अपने स्थानों पर शोपीस बने रहे। वेंटीलेटर की सुविधा होने के बावजूद जिला अस्पताल के ओपीडी तथा इमरजेंसी में रोजाना तीन से चार ऐसे मरीज पहुंचते हैं। जो सांस, ब्रेन ह्रेमरेज, गुर्दे और हार्ट फेलियर की समस्या से ग्रसित होते हैं। लेकिन वेंटीलेटर होने के बाद भी इन्हें इन वेंटीलेटर का फायदा नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में डाक्टर इनका प्राथमिक उपचार कर रेफर कर देते है। इनमें अधिकांश मरीज बेहद गरीब तबके के होते है, जो कि अपने मरीज का उपचार निजी अस्पताल में कराते कराते कर्ज के बोझ में दब जाते है। तीनों वेंटीलेटर को स्वास्थ्य विभाग ने दूूसरी लहर में एल-2 अस्पताल में इस्तेमाल किया। इसके बाद यह उसी तरह पड़े हुए हैं।
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