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भारत की राष्ट्रीय चेतना का स्वर है वंदे मातरम : वंदना

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सर्वोदय पीजी कालेज घोसी में सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गान करते विद्यार्थी एवं अध्यापक।संवाद
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घोसी। वंदे मातरम राष्ट्रगीत के 150 साल पूरे होने पर बृहस्पतिवार को सर्वोदय पीजी कॉलेज घोसी में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सामूहिक राष्ट्रगीत गाकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद किया। प्राचार्या वंदना पांडेय और प्राध्यापक प्रोफेसर राजेश्वर प्रसाद ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना का वह स्वर है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में असंख्य देशभक्तों के हृदय में नई ऊर्जा का संचार किया था।
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उन्होंने कहा कि इस गीत की रचना बंकिमचंद चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1875 में की थी और पहली बार बंग दर्शन नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। कहा कि जब तक भारत पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा रहा, यह गीत लोगों के लिए आत्मबल और संघर्ष का प्रतीक बना। वंदे मातरम ने स्वतंत्रता संग्राम के प्रत्येक चरण में भारतीयों के हृदय में एक नई चेतना का संचार किया और यह आज भी राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता है। डॉ. अमरजीत ने कहा कि यह गीत भारतभूमि के प्रति भक्ति और श्रद्धा का अनूठा उदाहरण है। स्वाधीनता आंदोलन का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस भावधारा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें धरती को माता के रूप में पूजने की परंपरा रही है। इसे राष्ट्र गीत का दर्जा दिया गया, जो हमारे देश की अस्मिता और एकता का प्रतीक है। विद्यार्थियों से कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति आदर भाव रखना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। डॉ. विवेक यादव, डॉ. राजीव मिश्र, डॉ. संजय कुमार राय, डॉ. नवनीत कुमार उपाध्याय, डॉ. सत्येंद्र कांत मौर्य, डॉ. जुबैर आलम, डॉ. धनंजय शर्मा आदि लोग मौजूद रहे।
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