मऊ। जिले में बारिश होने से किसानों के चेहरे खिले हैं, लेकिन जरुरत के समय साधन सहकारी समितियों से यूरिया नदारद है। इसे लेकर किसान परेशान हैं। समितियों पर यूरिया न होने से निजी दुुकानदार चांदी काट रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि यूरिया की रैक आने वाली है।जिले मेें 95हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गई है। सितंबर माह मेें अन्य महीनों के मुकाबले अच्छी बारिश होने ने से धान की फसल में यूरिया की डिमांड बढ़ गई है। बारिश के आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो सितंबर 2018 में 39एमएम, वर्ष 2019 सितंबर में 235.76एमएम, वर्ष 2020 सितंबर में 119.25एमएम, वर्ष 2021 सितंबर में 189.5एमएम, वर्ष 2022 में अब तक 173.25 बारिश हुई है। जिले में बारिश का क्रम जारी रहने से धान की फसल में यूरिया का छिड़काव करने के समय साधन सहकारी समितियों पर यूरिया नदारद है। किसानों को समय से खाद की आपूर्ति करने के लिए जिले में 10 पीसीएफ, 10 डीसीएफ तथा 92 साधन सहकारी समितियां खोली गई है। कुसुम्हा : क्षेत्र के गोठा, धनौली लोहड़ा, डीहिया डुलिया सहित विभिन्न साधन सहकारी समितियों पर यूरिया नहीं है। किसान बृजेश मौर्य का कहना है कि प्रति वर्ष यूरिया नदारद रहती है। किसान अतुल राय का कहना है कि बारिश के बाद धान की फसल में यूरिया का छिड़काव करना है, लेकिन साधन सहकारी समिति पर यूरिया नदारद है। कब आएगी पता नहीं चल पा रहा है। एआर, साधन सहकारी समितियां जगदीश प्रसाद ने बताया कि 2600 एमटी यूरिया की रैक आने वाली है।डिमांड के अनुरुप साधन सहकारी समितियों पर 15-15 एमटी यूरिया भेजी जा रही है।