चार माह पूर्व जमीनी विवाद में हुई मारपीट के दौरान घायल अधेड़ की बुधवार की सुबह मौत हो गई। इस पर गुस्साए परिवार वालों और आसपास के लोगों ने शव को मर्यादपुर कस्बे के मुख्य मार्ग पर रखकर मर्यादपुर-मधुबन मार्ग जाम कर दिया। इससे सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी और एएसपी के आश्वासन पर मामला शांत हुआ। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मधुबन थाना क्षेत्र के लधुवाई में 45 वर्षीय खुरचन राजभर का पड़ोसियों से बंजर जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। 18 जनवरी को इसी विवाद में दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई थी। खुरचन को अंदरूनी चोट आई थी। वह गंभीर रुप से घायल हो गया था। परिवार वालों की मानें तो आर्थिक तंगी के चलते उसका सही तरीके से इलाज नहीं हो पा रहा था। बुधवार को खुरचन की तबियत बिगड़ने पर परिवार के लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहे थे की रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। गुस्साए लोगों ने बुधवार की सुबह लगभग सात बजे शव को मर्यादपुर-मधुबन मार्ग पर रखकर सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी सड़क के बीचोबीच बैठकर नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मारपीट की घटना होने के चार माह बाद भी पुलिस प्रशासन की ओर से मामले की जांच तक नहीं कराई गई। दोषी खुलेआम घूम रहे हैं। परिवार के लोगों का आरोप था कि घटना के महीनों बाद भी अभियुक्तों की न तो गिरफ्तारी हुई और न ही प्रशासन ने उक्त जमीन का निस्तारण किया।
सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी लाइन लग गईं। मामले की जानकारी होने पर लगभग 11 बजे एसडीएम अमरनाथ राय व एएसपी सुशील सिंह मौके पर पंहुच गए। उनके समझाने पर जाम खुला। गौरतलब है कि खुरचन की मौत के बाद तमाम सवाल प्रशासन पर उठ रहे थे। विवादित जमीन मृतक खुरचन के घर के सामने सहन थी। जिस पर खुरचन का वर्षों से कब्जा था। लेकिन लेखपाल ने उसे उसके पट्टीदारों को पट्टा कर दिया था। उसके पट्टीदार हर हाल में उसे लेना चाहते थे। इसके लिए खुरचन ने तहसील दिवस पर भी गुहार भी लगाई थी, लेकिन प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया।