नगर में कुछ इस प्रकार से सुरक्षा को ताक पर रखकर वाहन चला रहे नाबालिग।
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सुरक्षित सफर के लिए बने यातायात नियमों बनाए गए नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इन नियमों का पालन न होने से सड़क हादसों में दिन पर दिन इजाफा होता जा रहा है। इसके लिए यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले तो जिम्मेदार हैं। अधिकांश सड़क हादसों की वजह अप्रिशिक्षित वाहन चालक हैं। हालत यह है कि जिले के विभिन्न मार्गों पर संचालित अधिकांश डग्गामार वाहनों को की स्टेयरिंग अप्रशिक्षित चालकों के हाथों में है।
जिले में पिछले एक साल में कुल 1268 हादसे हुए, जिसमें 23 लोगों की जान चली गई, जबकि 1813 लोग विभिन्न सड़क दुर्घटनाओ में घायल हुए। इन सड़क दुर्घटनाएं 75 फीसद चालकों की गलती से हुए। जहां नियमों को ताक पर रख अप्रिक्षित वाहन चालकों द्वारा पीछे ओवरटेक करना, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना, वाहनों में जरूरत से अधिक भीड़ होना, गति से अधिक तेज गाड़ी चलाना, सीट-बेल्ट और हेलमेट का प्रयोग न करने के मामले सामने आए।
जिले में दो हजार सवारी वाहन आरटीओ कार्यालय में पंजीकृत है, लेकिन मानक को दरकिनार कर कई रूटों पर खटारा वाहनों चल रहे हैं। अधिकांश वाहन तो महानगरों से रिजेक्ट किए गए हैं। इन्हें जिले में चलाने की मानों छूट मिली हुई है। यात्रियों का कहना है कि इनका हार्न छोड़कर बाकी सब कुछ बजता रहता है। टूटे शीशे, जर्जर बाडी और गेट के चलते आए दिन यात्री घायल हो रहे। एआरटीओ कहकशां खातून का कहना है कि समय समय पर अभियान चलाकर अप्रशिक्षत चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है।