नगर क्षेत्र के श्रीराम मेला समिति के तत्वावधान में शनिवार को बालि सुग्रीव युद्घ, बालि वध, लंका दहन आदि लीलाएं हुईं। राम द्वारा सात पेड़ों को एक साथ भेद देने के बाद सुग्रीव को यह विश्वास हुआ की राम साधारण मनुष्य नहीं है। इस दौरान हनुमान जी माता सीता की खोज करने के बाद लंका को जला देते है।
सुग्रीव प्रभु के चरणों में गिर जाते है । बाद में श्रीराम सुग्रीव को बालि से युद्घ करने के लिए कहते हैं। सुग्रीव बालि को युद्घ के लिए ललकारते हुए कहते हैं कि हे बालि अब तुम्हारा अंत समय निकट है। बालि के प्रहार से घायल होकर सुग्रीव भाग कर राम के पास जाकर कहते हैं कि हे राम तुम्हारे कहने पर मैंने अकारण बालि से पुन: बैर मोल ले लिया अब वह मुझे मार डालेगा। राम कहते हैं कि सुग्रीव तुम दोनों भाईयों का स्वरुप एक सा है, इस कारण मैं पहचान नहीं पाया। इस दौरान प्रभु श्रीराम अपने गले का हार सुग्रीव को पहना दिए। इसके बाद सुग्रीव पुन: बालि से युद्घ के लिए गए। दोनों भाईयों में युद्घ के दौरान उचित समय देखकर राम पेड़ की आड़ लेकर बालि को बाण मारते हैं। बाण लगते ही बालि धाराशायी होकर भूमि पर गिर पड़ता है। बालि का वध होते ही उपस्थित जनसमूह श्रीराम का जयघोष करने लगता है। भगवान राम समेत सबसे मिलकर हनुमान अपने साथियों समेत सीता माता की खोज में निकल पड़ते हैं। हनुमान छलांग लगाकर समुद्र को पार कर लंका पुरी में प्रवेश करते हैं। लंका पहुंचने पर हनुमान की मुलाकात विभीषण से होती है। विभीषण से सीता माता का पता पूछ कर हनुमान अशोक वाटिका में पहुंचते हैं। वाटिका में हनुमान अक्षय कुमार का युद्घ होता है जिसमें अक्षय कुमार मारा जाता है। इसके बाद मेघनाद हनुमान को बंदी बनाकर रावण के पास ले जाता है। रावण हनुमान को कड़ी से कड़ी सजा देने के लिए कहता है लेकिन विभीषण द्वारा समझाने पर उसकी पूंछ में आग लगाने के लिए कहता है। पूंछ में आग लगते ही हनुमान महलों के उपर चढ़कर पूरी लंका को जला देते हैं। लंका दहन के साथ ही आरती के बाद रामलीला समाप्त हो गई।