मऊ। विशेष न्यायाधीश एससी/ एसटी एक्ट हरेंद्र प्रसाद ने अनुुुसूचित जाति के व्यक्ति की हत्या में नामजद तीन आरोपियों हत्या कर शव को नदी में फेंककर साक्ष्य मिटाने के मामले में दो को दोषी पाया। दोनों दोषियों को आजीवन कारावास और 21-21 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। एक आरोपी की मौत होने के चलते उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र के सरया गांव निवासिनी मीना भारती की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। वादिनी का कथन था कि 20 नवंबर 2008 को आरोपियों ने उसके पति सोतिम राम की हत्या कर शव को तमसा नदी में फेंक दिए।
पुलिस ने विवेचना के बाद हालिमाबाद गांव निवासी जितेंद्र साहनी, प्रधानपुर गांव निवासी विनोद और बिरजू राम के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय में अभियोजन की ओर से कुल 9 गवाहों को पेश कर पक्ष रखा। विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद जितेंद्र साहनी और बिरजू राम को हत्या कर साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी पाया।
दोषी मिलने पर दोनों को आजीवन कारावास के साथ ही 21-21 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा हो जाने पर 70 प्रतिशत धनराशि वादिनी मुकदमा के आश्रितों को देने का आदेश दिया।