मऊ। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट हरेंद्र प्रसाद ने अनुसूचित जाति, जनजाति के व्यक्ति के साथ मारपीट करने और गाली देने के मामले में नामजद दो आरोपियों को सुनवाई के बाद मारपीट व गाली देने के मामले में दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद दोनों को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए 6-6 माह तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया। मामला मधुबन थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार मधुबन थाना क्षेत्र के सिकडीकोल गांव निवासी चुन्नीलाल धोबी पुत्र मुखराम धोबी की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। वादी का कथन था कि 30 नवंबर 2002 की शाम 4 बजे छप्पर डालने से रोकने की बात को लेकर गांव के ही रामप्रताप सिंह और अमरजीत सिंह ने उसे गाली देते हुए मारपीट की। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक सत्येंद्र नाथ राय एवं अखिलेश कुमार सिंह ने कुल चार गवाहों को पेशकर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण राम प्रताप सिंह व अमरजीत सिंह को मारपीट व गाली देने के मामले में दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद दोनों को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए 6-6 माह तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया।