बेसिक शिक्षा विभाग की छात्राओं को आत्मरक्षार्थ दी जाने वाली ‘सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग’ अधर में है। कारण, शासन से बजट का नहीं मिलना बताया जा रहा। ऐसे में योजना पर बजट का ग्रहण लग गया है। प्रशिक्षकों की नियुक्ति भी पूरी नहीं हो सकी है। 442 विद्यालयों के लिए 92 प्रशिक्षकों की जरूरत है लेकिन अब तक महज 27 प्रशिक्षक ही मिल सके हैं। इनका प्रशिक्षण भी अभी तक नहीं कराया गया है।
जिले में 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय तथा पांच कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में लगभग 15 हजार बालिकाएं अध्ययनरत हैं। बालिकाओं से छेड़छाड़ तथा अन्य बढ़ती आपराधिक वारदातों के प्रति सरकार गंभीर है।
इसी के चलते शासन ने परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को आत्मरक्षा के लिए प्रत्येक विद्यालय में तीन माह का जूडो कराटे, ताइक्वांडो, लाठी भांजना आदि का प्रशिक्षण दिया जाना है।
विभाग की तरफ से प्रशिक्षकों की तैनाती के लिए अक्तूबर माह में विज्ञापन प्रकाशित कराया गया था। लेकिन विभाग को मात्र 27 पात्र अभ्यर्थी ही मिले। चयन प्रक्रिया पूरी कर विभाग की तरफ से शासन से बजट की मांग की गई है, लेकिन अभी तक बजट का आवंटन न होने से प्रशिक्षण शुरू नहीं हो सका है। पात्र 27 प्रशिक्षक मिल पाए हैं। न्याय पंचायत स्तर पर भी प्रशिक्षण कराने पर 92 प्रशिक्षकों की आवश्यकता पड़ेगी। तकनीकी पेंच से अधिकारी परेशान हैं। निपटने के लिए विभाग की तरफ से आत्म रक्षा प्रशिक्षण के दौरान ही शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।