कारोबारियों में हाहाकार, सभी त्रस्त
पांच सौ और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद होने के बाद बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। सभी तरह के व्यापार प्रभावित हैं। इससे आम लोगों को खासी परेशानी हो रही है। कहीं बिक्री प्रभावित है तो कहीं उत्पादन ही ठप है। नोटबंदी के प्रभाव में छोटे से लेकर बड़े व्यापारी हैं। कारोबार के ठप होने से भविष्य की चिंता उन्हें सता रही है।
आठ नवंबर की रात से 1000 और 500 रुपये के नोट के बंद होने के बाद हर कोई अपने रुपये को जमा करने एवं घर की जरूरत पूरी करने के लिए लाइन में खड़ा नजर आ रहा है।
इससे जहां कारोबार प्रभावित हुआ है वहीं लेन देन प्रभावित होने से लोगों को तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बाजार में इस कदर हाहाकार की स्थिति है कि हर किसी की विक्री पर प्रभाव है। बाइक से लेकर बड़े वाहन की विक्री पर रोक है। ग्राहक उन्हें या तो पुराने नोट देना चाहते हैं या अपनी खुद की समस्या से जूझने के चलते अभी इन सामानों पर अपना ध्यान हटाए हुए हैं।
यही हाल बाजार में खुदरा मूल्य से लेकर थोक भाव के किराना, मिठाई, जनरल स्टोर, कापी-किताब, कपड़ा, फल, सब्जी, मंडी आदि पर भी है। बड़े दुकानदार छोटे दुकानदारों को अपना सामान नहीं बेच पा रहे हैं। क्योंकि छोटे दुकानदार चेक से भुगतान करना नहीं चाहते हैं वह थोड़े बहुत पैसे से अपना धंधा चलाते थे लेकिन इस समय बड़े दुकानदारों ने भी हाथ खड़ा कर लिया है।
बड़े कारोबारी भी हर चेक एवं हर माल का हिसाब किताब एवं बिल रखने की आदत से रूबरू नहीं होना चाहते हैं। इससे वह भी इस व्यवस्था से उबर नहीं पा रहे हैं। वह अपना माल भी नहीं मंगा पा रहे हैं। आर्डर देने पर उनसे से भी नए नोट नगदी के रूप में मांगे जा रहे हैं। या एक लिमिट तक ही वह चेक स्वीकार कर रहे हैं।