फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बजट को लेकर कहीं खुशी तो कहीं मायूसी

विज्ञापन
विज्ञापन
मऊ। संसद में सोमवार को पेश होने वाले बजट को लेकर लोगों में सुबह से उत्सुकता रही। इस दौरान लोगों को जहां मौका मिला टीवी और मोबाइल पर चिपके नजर आए। बजट पेश होने के बाद लोगों में कही खुशी तो कही गम दिखाई दिया। इस दौरान जिले में रेलवे के दोहरीकरण का काम पूरा होने की उम्मीद जगी। तो अवरुद्घ फोर लेने निर्माण कार्य के पूरा होने की आस। लेकिन महंगाई पर नियंत्रण का प्रावधान न होने तथा टैक्स स्लैब में बढ़ोत्तरी न होने से महिलाओं के साथ कर्मचारियों में निराशा रही।
विज्ञापन

केंद्र सरकार की तरफ से एक फरवरी को संसद में पेश किए जाने वाले बजट को लेकर लोगों में खासी उत्सुकता रही। इस क्रम में सोमवार की सुबह से लोग टीवी से चिपके रहें। बजट जारी होने के बाद अधिकांश वर्ग और ट्रेड के लोग बजट से नाखुश दिखे। हालांकि बात करने पर अर्थशास्त्री और विशेषज्ञों ने बजट को रोजगार परक बताया। अर्थशास्त्री ने कहा कि बजट मानव विकास वाला है। तो सीए ने कहा कि इस बजट से रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कृषि को बढ़ावा देने के लिए भले ही सरकार ने एक फंड की व्यवस्था की है लेकिन किसान इससे ना खुश है।
इस क्रम में टैक्स स्लैब में बढ़ोत्तरी न होने से कर्मचारी मायूस दिखे। तो महंगाई पर लगाम न लगने की व्यवस्था न होने से महिलाएं भी काफी नाराज दिखी। वहीं होम लोन पर डेढ लाख रुपये तक ब्याज मुक्त करने पर लोगों ने राहत महसूस किया। इलेक्ट्रनिक सामान के साथ कार आदि महंगी होने से लोग नाराज दिखे। बात करने पर अलग अलग ट्रेड के लोगों की अपनी अपनी राय रही।
विज्ञापन

सीए राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार की तरफ से पेेश किया गया बजट संतुलित बजट है। इंश्योरेंस क्षेत्र में 74 फीसदी तक एफडीआई बढ़ा दी गई है। पहले यहां पर सिर्फ 49 फीसदी तक की ही इजाजत थी। इससे बीमा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। लोगों को बीमा कराना सस्ता होगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बैंकों के एनपीए पर निगरानी रखने के लिए परिसंपत्ति पुनर्निर्माण और प्रबंधन कमेटी बनेगी। इससे बैंकों का एनपीए घटेगा। बैंकों से कारोबारियों तथा आम लोगों को लोन आसानी से मिलगा। इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ने से विकास गति तेज होगी। आम लोगों की मुश्किलें आसान होगी।
सीए विजय अग्रवाल का कहना है कि पब्लिक सेक्टर बैंकों में 20,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने का एलान किया है। इससे बैंकों का एनपीए घटेगा। लोगों को व्यवसायिक कार्यों के लिए बैंक से लोन आसानी से मिल सकेगा। इससे बाजार में पैसा आएगा। पब्लिक सेक्टर बैंकों में पैसा जमा करने वालों को सेफ्टी मिलेगी। इसके अलावा दो सरकारी बैंकों एवं एक इंश्योरेंस कंपनी के विनिवेश की घोषणा की गई है। लोगों को बीमा कराना सस्ता होगा। रोजगार के अवसर बढ़ेेगे। सभी गैर-रणनीति और रणनीतिक क्षेत्रों में विनिवेश की नीति को सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है। इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ने से विकास होगा।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष डॉ. रामगोपाल गुप्ता का कहना था कि व्यापारियों के लिए बजट निराशाजनक है। आयकर स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। कोरोना काल में आयकर सीमा 10 लाख की मांग की जा रही थी। काटन का प्रयोग 90 प्रतिशत आबादी करती है। काटन का प्रयोग जन्म से मरण तक होता है। बजट में काटन पर 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी बढ़ाया जाना जनविरोधी है। कस्टम ड्यूटी को वापस लिया जाए। 75 साल से ऊपर वरिष्ठ नागरिक का आयकर रिटर्न से छूट दिया जाना तथा जीएसटी को सरलीकरण करने की बात किया जाना स्वागत योग्य कदम है।
उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष उमाशंकर ओमर का कहना है कि कोरोना काल में व्यापारी कर्ज के बोझ से दबे पड़े हैं। बजट में व्यापारियों को कोई राहत नहीं मिली है। सीनियर सिटीजन को आयकर में छूट देने की बात कही गई है। स्वागतयोग्य कदम है। व्यापारी हबीबुल्लाह टांडवी का कहना है कि व्यापारियों के लिए बजट निराशाजनक है। काटन पर 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी बढ़ने से धागा महंगा मिलेगा। इससे साड़ी कारोबार पर विपरीत असर पड़ेगा। व्यापारी जमाल अर्पण का कहना है कि व्यापारियों के लिए बजट में कुछ भी नहीं है। काटन पर 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी बढ़ाए जाने से साड़ी कारोबार पर विपरीत असर पड़ेगा। जीएसटी को सरलीकरण नहीं किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें