जिले की करीब 26 लाख की आबादी पर तीन 100-100 बेड के अस्पताल हैं। वहीं दस सीएचसी भी सेवाएं दे रहीं हैं। लेकिन जिले में मात्र एक ही हृदय रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल में है। गुलाबी ठंड शुरू हो चुकी है। ठंड बढ़ने के साथ ही हृदय रोगियों की परेशानी भी बढ़ सकती है।
जिला अस्पताल में कुछ माह पहले ही संविदा पर एक डॉक्टर की तैनाती की गई हैं। दरअसल, सर्दी के दिनों में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सर्दी के सीजन में इन अस्पतालों में पहुंचने वाले हृदय रोगियों की परेशानी बढ़ सकती है। वहीं निजी अस्पतालों में भी केवल दो हृदय रोग विशेषज्ञ हैं।
हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी के बाद जिला अस्पताल में करीब डेढ़ साल पहले डॉ. पी एन चतुर्वेदी को पुनर्नियोजित किया गया था। बता दें कि पुनर्नियोजन की अवधि दो साल की होती है। डेढ़ साल होने के बाद अब डॉ. पी एन चतुर्वेदी छह माह के लिए जिला अस्पताल में तैनात रहेंगे। वहीं जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी पर भी एक भी चेस्ट फिजिशियन भी नहीं है। हृदय रोग विशेषज्ञ के अवकाश पर होने से परेशानी है। चिकित्सकों के मुताबिक ठंड में आम तौर पर करीब 10 फीसद हार्ट अटैक के मामले बढ़ जाते हैं।
जिले में 63 निजी अस्पताल, 20 नर्सिंग होम और 62 क्लीनिक का संचालन
जिले में अभी 63 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, जबकि नर्सिंग होम की संख्या 20 है। वहीं 62 क्लीनिक का भी संचालन हो रहा है। लेकिन इन अस्पतालों का मिलाकर पूरे जनपद में मात्र दो हृदय रोग विशेषज्ञ ही है। चिकित्सक के अभाव में लोग या तो वाराणसी या लखनऊ जाने को मजबूर रहते हैं।
जिला अस्पताल में एक हृदय रोग विशेषज्ञ तैनात है, सीएचसी पर हृदय रोग विशेषज्ञ का कोई पद नहीं है।-डॉ. बीके यादव, एसीएमओ