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Mau News: सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं, निजी केंद्रों पर लग रहे 800 रुपये

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सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन न होने के कारण गर्भवती महिलाओं को निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर महंगी जांच करानी पड़ रही है। इस समस्या से न केवल महिलाओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 700 से 800 रुपये तक का शुल्क लिया जाता है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली कई महिलाओं के लिए काफी अधिक है।
आर्थिक तंगी से जूझ रहीं कुछ महिलाएं तो इस महत्वपूर्ण जांच को करा ही नहीं पाती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। रंगीन अल्ट्रासाउंड कराने पर तीन हजार रुपये का बिल बनता है।
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जिले में 10 सीएचसी का संचालन हो रहा है, सीएचसी पर ओपीडी बढ़ रही है लेकिन संसाधन का अभाव है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड मशीन या रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों पर जांच करा रही है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत चुनिंदा निजी केंद्रों पर प्रति अल्ट्रासाउंड 420 रुपये में जांच की सुविधा दी है, जो महीने की 1, 9, 16 और 24 तारीख को उपलब्ध रहती है।
जिले में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्रों के टोकन नहीं मिल पा रहे हैं। सैकड़ों गर्भवतियों की जांच प्रभावित हो रही है। निजी केंद्रों में महंगे शुल्क पर जांच कराने को मजबूर हैं।

पोर्टल के अपडेट होने की वजह से ई-वाउचर नहीं बन पा रहे थे, जिले में 16 एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) पर अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा है। अब आगामी 9 तारीख से सभी गर्भवतियों की जांच स्वास्थ्य केंद्र पर होगी। -डॉ. बीके यादव, नोडल अधिकारी
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