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निर्माणाधीन रोडवेज परिसर में नहीं है यात्री सुविधा की व्यवस्था

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मऊ। अनलॉक होने पर जिला मुख्यालय पर मौजूद रोडवेज से सभी रूटों पर बसों का संचालन तो शुरु कर दिया गया, लेकिन कोरोना से बचाव तो दूर बरवक्त रोडवेज परिसर में यात्रियों की सुविधा के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है। कारण रोडवेज परिसर में हो रहा निर्माण इसका प्रमुख कारण है। हालांकि बात करने पर एआरएम विवेकानंद त्रिपाठी ने दावा किया कि कोविड से बचाव के सारे प्रबंध किए गए है। नियमों का पालन कराने के बाद ही यात्रियों को बस में इंट्री दी जा रही है लेकिन मौके पर जाने पर हकीकत कोसो दूर नजर आई।
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जिला मुख्यालय पर सहादतपुरा मुहल्ले में मौजूद मऊ डिपो से 47 बसों का संचालन होता है। इसमें लखनऊ रूट पर सबसे ज्यादा बसें हैं। डिपो का भवन जर्जर होने कारण यहां पर नए भवन निर्माण का प्रस्ताव शासन से मंजूर किया गया। इस क्रम में दो वर्षों में यहां नया भवन तो बन कर तैयार हो गया है। लेकिन बसों को खड़ा करने के लिए प्लेटफार्म निर्माण का कार्य चल रहा है। इसके अलावा पुराना जर्जर भवन डिमालिश कराना है। पुराना भवन ढहाए जाने के बाद ही रोडवेज यात्रियों के लिए निगम सुविधा मुहैया करा पाएगा। क्योंकि निर्माण कार्य जारी रहने और पुराने भवन के न ढहाए हाने के कारण रोडवेज में बसों के आने के बाद यात्रियों को खड़ा होने की जगह नहीं बचती है। इसके चलते मऊ डीपो में बसों के ठहराव से लेकर उसके संचालन की व्यवस्था तितर बितर है। इस बीच रोडवेज यात्रियों को सुविधा कहां से देगा।
रोडवेज पर बहाल करनी है ये सुविधाएं
मऊ। अनलॉक में बसों का संचालन पूरी तरह से शुरू कर दिया गया है, ऐसे में रोडवेज को कोविड बचाव की व्यवस्था करनी है, इसमें बस में यात्रा करने से पूर्व यत्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग करानी है, इसके अलावा में चढ़ने और उतरने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। कंडेक्टर को अपने पास सैनिटाइजर रखना होगा, ताकि वो यात्रियों का हाथ सैनिटाइज करा सकें। इसी क्रम में बिना मास्क लगाए यात्रियों को यात्रा नहीं करने देना है। लेकिन शनिवार को रोडवेज पर पहुंचने पर व्यवस्था इसके विपरीत मिली। इस दौरान यात्री बसों के आने पर टूट पड़ रहें थे। थर्मल स्क्रीनिंग करने वाली टीम का कही पता नहीं था। ना ही किसी कंडेक्टर के पास सैनिटाइजर मिला। बात करने पर एआरएम विवेकानंद त्रिपाठी ने बताया कि वो कोविड-19 से बचाव के लिए शासन से जारी सभी नियमों का पालन करा रहें है। अब कभी कभी यात्रियों की भीड़ जब भेड़ बन जाती है, तो खुद का बचाव करने के लिए उन्हें शांत होना पड़ता है। लेकिन यात्रा के दौरान यदि कोई यात्री मास्क नही पहने रहता है उसे छह रुपया चार्ज कर मास्क दिया जाता है, यदि वह मास्क लेने के लिए तैयार नहीं होता है तो उसे उतारने का आदेश कंडेक्टर को दिया गया है।
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अनलॉक में बसों का संचालन शासन से जारी गाइड लाइन और नियम के अनुसार शुरू किया गया। रुटीन के यात्रियों ने बताया कि बस या स्टेशन पर उन्हें किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं दी जाती। न थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था है न सौनिटाइजेशन की। मऊ डिपो के एआरएम विवेकानंद त्रिपाठी ने सुविधा मुहैया कराने का दावा किया लेकिन यात्रियों को कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। मऊ से बलिया की लगभग हर दिन यात्रा करने वाले विनोद सिंह ने बताया कि रोडवेज चाहे जो दावा करे, लेकिन वास्तव में उन्हें कभी किसी प्रकार की कोई सुविधा रोडवेज की तरफ से मुहैया नहीं कराई गई है। चाहे थर्मल स्क्रीनिंग का मामला हो या फिर सैनिटाइज करने का। इसीक्रम में आजमगढ़ से मऊ की प्रतिदिन यात्रा करने वाले रोहित ने बताया कि कम बसें चल रही थीं, जब भी और आज पूरी तरह से संचालन शुरू होने के बाद भी उन लोगों को रोडवेज की तरफ से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई। मऊ से देवरिया जाने के लिए गोरखपुर की बस में सवार यात्री शैलेश चौहान ने बताया कि बस में बैठने से पूर्व उनकी कोई थर्मल स्क्रीनिंग नहीं की गई। मऊ से गोरखपुर जाने वाले यात्री दीन दयाल ने बताया कि निगम सिर्फ दावा कर रहा, अब मजबूरी में वो रोडवेज बस से यात्रा कर रहें हैं लेकिन कोविड से बचाव के गाइड लाइन का रोडवेज कोई अनुपालन नहीं कर रहा।
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