जिला अस्पताल परिसर में तीन विभाग हैं। इसमें एलोपैथी विधा का जिला अस्पताल, होम्योपैथी का अलग अस्पताल तथा आयुष विभाग के तहत आयुर्वेद और यूनानी विधा की सेवाएं संचालित हैं।
यहां इस विधा के तीन डॉक्टर हैं, लेकिन बीते पांच साल से यहां दवाइयां नहीं मिली हैं। ऐसे में तैनात चिकित्सक मरीजों का उपचार तो करते हैं, लेकिन यहां लंबे समय से दवाइयों का अकाल है।
उधर, इसी परिसर में जिला अस्पताल में 290 प्रकार की दवाइयों का स्टॉक है, जबकि आयुष ब्लॉक के ठीक बगल में बने होम्योपैथी अस्पताल में भी दवाइयों का भरपूर स्टॉक है।
बुधवार को टीम सुबह 10 बजकर 50 मिनट पर आयुष ब्लॉक पहुंची। इस दौरान यूनानी के डॉक्टर मुहम्मद मुस्तफा अंसारी मरीजों का उपचार करते मिले। अस्पताल में सुबह आठ बजे से 10:50 बजे तक 13 मरीजों का परामर्श किया जा चुका था।
वहीं, एक मरीज उस्मान, जो प्लेटलेट कम होने की समस्या लेकर पहुंचे थे। इसी तरह मनोज, सुनील सहित अन्य मरीजों को यहां परामर्श मिला, लेकिन उन्हें दवाइयां नहीं मिलीं। कई मरीजों से डॉक्टर ने दवाइयां उपलब्ध न होने की बात कही।
इस संबंध में डॉक्टर मुहम्मद मुस्तफा अंसारी ने बताया कि वर्ष 2021 से दवाइयों की सप्लाई नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार शिकायत की जा चुकी है।
दवाइयां न मिलने पर मरीजों के नाराज होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जागरूक मरीज नाराज होकर कहते हैं कि सरकार दवाइयां देती है, लेकिन आप लोग उन्हें बेच देते हैं।
वहीं, डॉ. जी कुमार ने बताया कि उनके यहां भी पांच साल से दवाइयां नहीं हैं। मजबूरी में इलाज के बाद दवा मांगने वाले मरीजों को बगल में संचालित होम्योपैथी अस्पताल भेजना पड़ता है।
दोनों डॉक्टरों के अनुसार प्रतिदिन उनके यहां 80 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। यदि आयुर्वेद की ओपीडी भी जोड़ ली जाए तो यह संख्या 120 से अधिक हो जाती है।
वर्जन
भले ही आयुष विंग उनके परिसर में संचालित हो रहा हो, लेकिन इसका संचालन सीएमओ के अधीन आने वाले एनएचएम विंग से होता है। दवाइयों का स्टॉक क्यों नहीं भेजा जा रहा है, इसकी जानकारी वही दे सकेंगे। - डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस
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पिछले दो वित्तीय वर्षों से आयुष ब्लॉक के लिए बजट नहीं मिल रहा है। इसी कारण यह समस्या बनी हुई है। इस संबंध में शासन को पत्र भेजा जा चुका है। शासन से आदेश मिलते ही समस्या का निराकरण करा दिया जाएगा। - डॉ. बीके यादव, नोडल अधिकारी एनएचएम, एसीएमओ
दस मीटर की दूरी पर परामर्श भी, दवा भी
पड़ताल के बाद टीम ठीक बगल में संचालित होम्योपैथी विंग में पहुंची। यहां डॉ. उमेश कुमार सिंह मरीजों का उपचार करते मिले। डॉक्टर ने बताया कि सुबह 11 बजे तक 35 मरीज पहुंच चुके थे। उनके यहां रोजाना 150 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। यहां परदहा निवासी सोमन और भीटी की डिंपल ने बताया कि वे काफी समय से यहां उपचार कराने आती हैं और यहां दवाइयां मिलती हैं। इसके बाद टीम जिला अस्पताल की ओपीडी काउंटर पर पहुंची। यहां मरीजों की भीड़ दवाइयां लेते हुए दिखाई दी। स्टोर प्रभारी मुख्य फार्मासिस्ट महेंद्र ने बताया कि उनके यहां शासन के अनुसार पंजीकृत 290 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं। वर्तमान में किसी भी दवा की कमी नहीं है। कभी-कभी एंटी रेबीज वैक्सीन की कमी हो जाती है, लेकिन उसका स्टॉक भी जल्द उपलब्ध हो जाता है।
ड्रग वेयर हाउस में दवाइयों की कमी नहीं
जिले के 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को दवाइयां उपलब्ध कराने वाले ड्रग वेयर हाउस में भी दवाइयों की कमी न होने का दावा किया गया। इंचार्ज संजय पांडेय ने बताया कि सीएचसी के लिए आवश्यक 244 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं, जबकि 40 पीएचसी पर मिलने वाली 195 प्रकार की दवाइयों का भी पर्याप्त स्टॉक है।
2025 में तत्कालीन सीडीओ प्रशांत नागर ने खुद की थी जांच
जिला अस्पताल परिसर में संचालित आयुष विंग में दवाइयां उपलब्ध न होने पर वर्ष 2025 में तत्कालीन सीडीओ प्रशांत नागर ने स्वयं अस्पताल का निरीक्षण किया था। दरअसल, अमर उजाला ने तीन अप्रैल को ‘आयुर्वेद, यूनानी पद्धति से इलाज, दवाएं लिख रहे हैं एलोपैथ की...’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें बताया गया था कि यूनानी, आयुर्वेद और होम्योपैथी विधा के चिकित्सक वर्षों से उपचार तो कर रहे हैं, लेकिन दवाइयां उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को एलोपैथी दवाओं की सलाह देनी पड़ रही है। समाचार प्रकाशित होने के बाद सीडीओ ने जिला अस्पताल और आयुष विंग का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्हें पांच डॉक्टर अनुपस्थित मिले थे। साथ ही आयुष विंग में दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे।